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Rama Ahstakam

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[00:42.95] भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम् ।

[00:45.96] स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम् ॥ १ ॥

[00:49.70] जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशकं ।

[01:01.46] स्वभक्तभीतिभञ्जनं भजे ह राममद्वयम् ॥ २ ॥

[01:09.72] निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवापहम् ।

[01:17.20] समं शिवं निरञ्जनं भजे ह राममद्वयम् ॥ ३ ॥

[01:25.46] सहप्रपञ्चकल्पितं ह्यनामरूपवास्तवम् ।

[01:28.95] निराकृतिं निरामयं भजे ह राममद्वयम् ॥ ४ ॥

[01:40.70] निष्प्रपञ्चनिर्विकल्पनिर्मलं निरामयम् ।

[01:45.45] चिदेकरूपसन्ततं भजे ह राममद्वयम् ॥ ५ ॥

[01:48.46] भवाब्धिपोतरूपकं ह्यशेषदेहकल्पितम् ।

[01:59.71] गुणाकरं कृपाकरं भजे ह राममद्वयम् ॥ ६ ॥

[02:11.96] महावाक्यबोधकैर्विराजमानवाक्पदैः ।

[02:15.70] परं ब्रह्मसद्व्यापकं भजे ह राममद्वयम् ॥ ७ ॥

[02:23.45] शिवप्रदं सुखप्रदं भवच्छिदं भ्रमापहम् ।

[02:26.95] विराजमानदेशिकं भजे ह राममद्वयम् ॥ ८ ॥

[03:10.96] रामाष्टकं पठति यस्सुखदं सुपुण्यं

[03:29.96] व्यासेन भाषितमिदं शृणुते मनुष्यः

[03:32.70] विद्यां श्रियं विपुलसौख्यमनन्तकीर्तिं

[03:41.46] संप्राप्य देहविलये लभते च मोक्षम् ॥ ९ ॥

[03:46.45] ॥ इति श्रीव्यासविरचितं रामाष्टकं संपूर्णम् ॥