Hanuman Chalisa
[00:07.30] श्रीगुरु चरन सरोज रज , निज मनु मुक ुरु सुधारि।
[00:13.30] बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायक ु फल चारि।।
[00:24.28] बुद्धिहीन तनु जा निके, सुमिरौं पवन-कुमार।
[00:36.54] बल बु द्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
[01:00.05] जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
[01:02.03] रामदत अतु ू लित बल धामा।
[01:08.78] अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
[01:11.03] महाबीर बिक्रम बजरंगी।
[01:13.53] कुमति निवार सुमति के संगी।।
[01:16.04] कं चन बरन बिराज सुबेसा।
[01:27.30] कानन क ं डल क ु ंुचित के सा।।
[01:30.28] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
[01:44.53] कांधे मूंज जनेऊ साजै।
[01:46.54] संकर सुवन के सरीनंदन।
[01:47.29] तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
[01:59.78] विद्यावान गुनी अ ति चातुर।
[02:01.53] राम काज क रिबे को आतुर।।
[02:03.04] प्रभु च रित्र सुनिबे को रसिया।
[02:10.03] राम लखन सीता मन ब सिया।।
[02:12.53] सूक्ष्म रूप ध रि सियहिं दिखावा।
[02:14.79] बिकट रूप ध रि लंक जरावा।।
[02:17.03] भीम रूप ध रि असुर संहारे।
[02:19.29] रामचंद्र के काज संवारे।।
[02:21.78] लाय सजीवन लखन जियाये।
[02:33.78] श्रीरघुबीर हर नि> उर लाये।।
[02:41.04] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
[02:45.79] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
[02:50.28] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
[02:55.28] अस क हि श्रीपति कं ठ लगावैं।।
[02:59.53] सनकादिक ब्रह्मा दि मुनीसा।
[03:02.04] नारद सारद स हित अहीसा।।
[03:04.28] जम क ुबेर दिगपाल जहां ते।
[03:06.79] कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
[03:21.53] राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
[03:25.29] तुम उपकार सुग्रीव हिं कीन्हा।
[03:30.54] लंके स्वर भए सब जग जाना।।
[03:35.29] तुम्हरो मंत्र बिभी>न माना।
[03:37.53] जुग सहस्र जोजन पर भानू।
[03:45.04] ल्यो ता हि मधुर फल जानू।।
[03:48.28] प्रभु मु द्रिका मेलि मुख माहीं।
[03:49.79] जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
[03:51.28] दर्ग ुम काज जगत के जेते।
[03:53.78] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
[03:56.29] राम द आरे तुम रखवारे। ु
[04:02.03] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
[04:11.05] होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
[04:15.31] सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
[04:20.06] तुम रक्षक काह ू को डर ना।।
[04:24.80] आपन तेज सम्हारो आपै।
[04:29.30] तीनों लोक हांक तें कांपै।।
[04:34.05] भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
[04:36.06] महाबीर जब नाम सुनावै।।
[04:38.31] नासै रोग हरै सब पीरा।
[04:40.81] जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
[04:58.32] संकट तें हनुमान छु ड़ावै।
[04:59.81] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
[05:06.80] सब पर राम तपस्वी राजा।
[05:09.31] तिन के काज सकल तुम साजा।
[05:11.55] और मनोरथ जो कोई लावै।
[05:19.05] सोइ अ मित जीवन फल पावै।।
[05:21.55] चारों जुग परताप तुम्हारा।
[05:23.30] है पर सिद्ध जगत उजियारा।।
[05:25.55] साधु-संत के तुम रखवारे।
[05:28.05] असुर निकं दन राम दलारे।। ु
[05:40.56] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
[05:44.80] अस बर दीन जानकी माता।।
[05:49.55] राम रसायन तुम्हरे पासा।
[05:54.31] सदा रहो रघुप ति के दासा।।
[05:58.56] तुम्हरे भजन राम को पावै।
[06:04.05] जनम-जनम के द खु बिसरावै।।
[06:08.05] अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
[06:10.05] जहां जन्म ह रि-भक्त कहाई।।
[06:12.31] और देवता चित्त न धरई।
[06:15.05] हनुमत सेइ स र्ब सुख करई।।
[06:17.56] संकट कटै मिटै सब पीरा।
[06:19.56] जो सु मिरै हनुमत बलबीरा।।
[06:22.05] जै जै जै हनुमान गोसाई ।ं
[06:24.56] कृपा करह ु गुरुदेव की नाई।
[06:26.80] जो सत बार पाठ कर कोई।
[06:28.81] छूटहि बंदि महा सुख होई।।
[06:31.30] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
[06:33.55] होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
[06:38.81] तुलसीदास सदा ह रि चेरा।
[06:40.08] कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
[06:46.31] पवन तनय संकट हरन , मंगल मूर ति रूप।
[06:59.80] राम लखन सीता स हित, हृदय बसह ुसुर भूप।।
