Lrc Player

Shree Ganapati Atharvashirsha - Ajay Atul

Unknown artist
[06:28.70]·Synced by Guest·
This lyric sheet isn't paired with a song yet, so lines are shown but won't sync or seek.

[01:11.41] ॐ नमस्ते गणपतये।

[01:19.91] त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि

[01:23.41] त्वमेव केवलं कर्ताऽसि

[01:26.66] त्वमेव केवलं धर्ताऽसि

[01:29.67] त्वमेव केवलं हर्ताऽसि

[01:34.91] त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि

[01:39.91] त्व साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।1।।

[01:42.41] ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि।।2।।

[01:47.91] अव त्व मां। अव वक्तारं।

[01:53.16] अव श्रोतारं। अव दातारं।

[02:00.16] अव धातारं। अवानूचानमव शिष्यं।

[02:06.41] अव पश्चातात। अव पुरस्तात।

[02:12.91] अवोत्तरात्तात। अव दक्षिणात्तात्।

[02:19.66] अवचोर्ध्वात्तात्।। अवाधरात्तात्।।

[02:25.41] सर्वतो माँ पाहि-पाहि समंतात्।।3।।

[02:29.16] त्वं वाङ्‍मयस्त्वं चिन्मय:।

[02:33.16] त्वमानंदमसयस्त्वं ब्रह्ममय:।

[02:39.16] त्वं सच्चिदानंदाद्वितीयोऽषि।

[02:41.41] त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्माषि।

[02:47.16] त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽषि।।4।।

[02:51.41] सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।

[02:56.66] सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।

[03:01.66] सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।

[03:06.41] सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।

[03:11.41] त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभ:।

[03:14.66] त्वं चत्वारिकाकूपदानि।।5।।

[03:21.41] त्वं गुणत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।

[03:24.66] त्वं देहत्रयातीत:। त्वं कालत्रयातीत:।

[03:28.41] त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यं।

[03:31.41] त्वं शक्तित्रयात्मक:।

[03:35.92] त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।

[03:40.41] त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं

[03:43.67] रूद्रस्त्वं इंद्रस्त्वं अग्निस्त्वं

[03:49.92] वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं

[03:56.17] ब्रह्मभूर्भुव:स्वरोम्।।6।।

[04:04.42] गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।

[04:10.91] अनुस्वार: परतर:। अर्धेन्दुलसितं।

[04:17.66] तारेण ऋद्धं। एतत्तव मनुस्वरूपं।

[04:24.66] गकार: पूर्वरूपं। अकारो मध्यमरूपं।

[04:30.42] अनुस्वारश्चान्त्यरूपं। बिन्दुरूत्तररूपं।

[04:34.66] नाद: संधानं। सँ हितासंधि:

[04:39.41] सैषा गणेश विद्या। गणकऋषि:

[04:44.91] निचृद्गायत्रीच्छंद:। गणपतिर्देवता।

[04:51.17] ॐ गं गणपतये नम:।।7।।

[04:54.91] एकदंताय विद्‍महे।

[04:58.16] वक्रतुण्डाय धीमहि।

[05:03.17] तन्नो दंती प्रचोदयात।।8।।

[05:09.92] एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।

[05:16.66] रदं च वरदं हस्तैर्विभ्राणं मूषकध्वजम्।

[05:22.67] रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।

[05:30.17] रक्तगंधाऽनुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।।

[05:36.17] भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।

[05:42.91] आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृ‍ते पुरुषात्परम्।

[05:49.67] एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:।।9।।

[05:56.92] नमो व्रातपतये। नमो गणपतये।

[06:00.41] नम: प्रमथपतये।

[06:07.16] नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।

[06:10.67] विघ्ननाशिने शिवसुताय।

[06:16.42] श्रीवरदमूर्तये नमो नम:।।10।।

[00:00.00] एतदथर्वशीर्ष योऽधीते।

[00:00.00] स ब्रह्मभूयाय कल्पते।

[00:00.00] स सर्व विघ्नैर्नबाध्यते।

[00:00.00] स सर्वत: सुखमेधते।

[00:00.00] स पञ्चमहापापात्प्रमुच्यते।।11।।

[00:00.00] सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।

[00:00.00] प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।

[00:00.00] सायंप्रात: प्रयुंजानोऽपापो भवति।

[00:00.00] सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।

[00:00.00] धर्मार्थकाममोक्षं च विंदति।।12।।

[00:00.00] इदमथर्वशीर्षमशिष्याय न देयम्।

[00:00.00] यो यदि मोहाद्‍दास्यति स पापीयान् भवति।

[00:00.00] सहस्रावर्तनात् यं यं काममधीते तं तमनेन साधयेत्।13।।

[00:00.00] अनेन गणपतिमभिषिंचति

[00:00.00] स वाग्मी भवति

[00:00.00] चतुर्थ्यामनश्र्नन जपति

[00:00.00] स विद्यावान भवति।

[00:00.00] इत्यथर्वणवाक्यं।

[00:00.00] ब्रह्माद्यावरणं विद्यात्

[00:00.00] न बिभेति कदाचनेति।।14।।

[00:00.00] यो दूर्वांकुरैंर्यजति

[00:00.00] स वैश्रवणोपमो भवति।

[00:00.00] यो लाजैर्यजति स यशोवान भवति

[00:00.00] स मेधावान भवति।

[00:00.00] यो मोदकसहस्रेण यजति

[00:00.00] स वाञ्छित फलमवाप्रोति।

[00:00.00] य: साज्यसमिद्भिर्यजति

[00:00.00] स सर्वं लभते स सर्वं लभते।।15।।

[00:00.00] अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा

[00:00.00] सूर्यवर्चस्वी भवति।

[00:00.00] सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ

[00:00.00] वा जप्त्वा सिद्धमंत्रों भवति।

[00:00.00] महाविघ्नात्प्रमुच्यते।

[00:00.00] महादोषात्प्रमुच्यते।

[00:00.00] महापापात् प्रमुच्यते।

[00:00.00] स सर्वविद्भवति से सर्वविद्भवति।

[00:00.00] य एवं वेद इत्युपनिषद्‍।।16।।