Shree Ganapati Atharvashirsha - Ajay Atul
[01:11.41] ॐ नमस्ते गणपतये।
[01:19.91] त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि
[01:23.41] त्वमेव केवलं कर्ताऽसि
[01:26.66] त्वमेव केवलं धर्ताऽसि
[01:29.67] त्वमेव केवलं हर्ताऽसि
[01:34.91] त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि
[01:39.91] त्व साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।1।।
[01:42.41] ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि।।2।।
[01:47.91] अव त्व मां। अव वक्तारं।
[01:53.16] अव श्रोतारं। अव दातारं।
[02:00.16] अव धातारं। अवानूचानमव शिष्यं।
[02:06.41] अव पश्चातात। अव पुरस्तात।
[02:12.91] अवोत्तरात्तात। अव दक्षिणात्तात्।
[02:19.66] अवचोर्ध्वात्तात्।। अवाधरात्तात्।।
[02:25.41] सर्वतो माँ पाहि-पाहि समंतात्।।3।।
[02:29.16] त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मय:।
[02:33.16] त्वमानंदमसयस्त्वं ब्रह्ममय:।
[02:39.16] त्वं सच्चिदानंदाद्वितीयोऽषि।
[02:41.41] त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्माषि।
[02:47.16] त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽषि।।4।।
[02:51.41] सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।
[02:56.66] सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
[03:01.66] सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।
[03:06.41] सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।
[03:11.41] त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभ:।
[03:14.66] त्वं चत्वारिकाकूपदानि।।5।।
[03:21.41] त्वं गुणत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
[03:24.66] त्वं देहत्रयातीत:। त्वं कालत्रयातीत:।
[03:28.41] त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यं।
[03:31.41] त्वं शक्तित्रयात्मक:।
[03:35.92] त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
[03:40.41] त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं
[03:43.67] रूद्रस्त्वं इंद्रस्त्वं अग्निस्त्वं
[03:49.92] वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं
[03:56.17] ब्रह्मभूर्भुव:स्वरोम्।।6।।
[04:04.42] गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।
[04:10.91] अनुस्वार: परतर:। अर्धेन्दुलसितं।
[04:17.66] तारेण ऋद्धं। एतत्तव मनुस्वरूपं।
[04:24.66] गकार: पूर्वरूपं। अकारो मध्यमरूपं।
[04:30.42] अनुस्वारश्चान्त्यरूपं। बिन्दुरूत्तररूपं।
[04:34.66] नाद: संधानं। सँ हितासंधि:
[04:39.41] सैषा गणेश विद्या। गणकऋषि:
[04:44.91] निचृद्गायत्रीच्छंद:। गणपतिर्देवता।
[04:51.17] ॐ गं गणपतये नम:।।7।।
[04:54.91] एकदंताय विद्महे।
[04:58.16] वक्रतुण्डाय धीमहि।
[05:03.17] तन्नो दंती प्रचोदयात।।8।।
[05:09.92] एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।
[05:16.66] रदं च वरदं हस्तैर्विभ्राणं मूषकध्वजम्।
[05:22.67] रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।
[05:30.17] रक्तगंधाऽनुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।।
[05:36.17] भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।
[05:42.91] आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृते पुरुषात्परम्।
[05:49.67] एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:।।9।।
[05:56.92] नमो व्रातपतये। नमो गणपतये।
[06:00.41] नम: प्रमथपतये।
[06:07.16] नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।
[06:10.67] विघ्ननाशिने शिवसुताय।
[06:16.42] श्रीवरदमूर्तये नमो नम:।।10।।
[00:00.00] एतदथर्वशीर्ष योऽधीते।
[00:00.00] स ब्रह्मभूयाय कल्पते।
[00:00.00] स सर्व विघ्नैर्नबाध्यते।
[00:00.00] स सर्वत: सुखमेधते।
[00:00.00] स पञ्चमहापापात्प्रमुच्यते।।11।।
[00:00.00] सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।
[00:00.00] प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।
[00:00.00] सायंप्रात: प्रयुंजानोऽपापो भवति।
[00:00.00] सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।
[00:00.00] धर्मार्थकाममोक्षं च विंदति।।12।।
[00:00.00] इदमथर्वशीर्षमशिष्याय न देयम्।
[00:00.00] यो यदि मोहाद्दास्यति स पापीयान् भवति।
[00:00.00] सहस्रावर्तनात् यं यं काममधीते तं तमनेन साधयेत्।13।।
[00:00.00] अनेन गणपतिमभिषिंचति
[00:00.00] स वाग्मी भवति
[00:00.00] चतुर्थ्यामनश्र्नन जपति
[00:00.00] स विद्यावान भवति।
[00:00.00] इत्यथर्वणवाक्यं।
[00:00.00] ब्रह्माद्यावरणं विद्यात्
[00:00.00] न बिभेति कदाचनेति।।14।।
[00:00.00] यो दूर्वांकुरैंर्यजति
[00:00.00] स वैश्रवणोपमो भवति।
[00:00.00] यो लाजैर्यजति स यशोवान भवति
[00:00.00] स मेधावान भवति।
[00:00.00] यो मोदकसहस्रेण यजति
[00:00.00] स वाञ्छित फलमवाप्रोति।
[00:00.00] य: साज्यसमिद्भिर्यजति
[00:00.00] स सर्वं लभते स सर्वं लभते।।15।।
[00:00.00] अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा
[00:00.00] सूर्यवर्चस्वी भवति।
[00:00.00] सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ
[00:00.00] वा जप्त्वा सिद्धमंत्रों भवति।
[00:00.00] महाविघ्नात्प्रमुच्यते।
[00:00.00] महादोषात्प्रमुच्यते।
[00:00.00] महापापात् प्रमुच्यते।
[00:00.00] स सर्वविद्भवति से सर्वविद्भवति।
[00:00.00] य एवं वेद इत्युपनिषद्।।16।।
