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Hanuman Ashtak [Full Song] By Hariharan - Shree Hanuman Chalisa - Hanuman Ashtak(MP3_320K)

Unknown artist
[06:03.43]·Synced by Guest·
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[00:05.93] बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।

[00:13.94] ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो।

[00:22.94] देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।

[00:32.18] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥

[00:52.92] बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो।

[01:01.67] चौंकि महा मुनि साप दियो तब चाहिय कौन बिचार बिचारो।

[01:09.93] कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो।

[01:18.69] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

[01:38.68] 2||

[01:40.95] अंगद के सँग लेन गये सिय खोज कपीस यह बैन उचारो।

[01:43.43] जीवत ना बचिहौ हम सो जु बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।

[01:51.93] हेरि थके तट सिंधु सबै तब लाय सिया-सुधि प्रान उबारो।

[02:00.91] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥

[02:22.44] रावन त्रास दई सिय को सब राक्षसि सों कहि सोक निवारो।

[02:30.93] ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाय महा रजनीचर मारो।

[02:39.44] चाहत सीय असोक सों आगि सु दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।

[02:47.93] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥४॥

[03:03.94] बान लग्यो उर लछिमन के तब प्रान तजे सुत रावन मारो।

[03:12.43] लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो।

[03:20.68] आनि सजीवन हाथ दई तब लछिमन के तुम प्रान उबारो।

[03:29.19] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥५॥

[03:50.92] रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग कि फाँस सबै सिर डारो।

[03:59.93] श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो।

[04:08.67] आनि खगेस तबै हनुमान जु बंधन काटि सुत्रास निवारो।

[04:15.92] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥६॥

[04:31.93] बंधु समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो।

[04:40.44] देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।

[04:48.68] जाय सहाय भयो तब ही अहिरावन सैन्य समेत सँहारो।

[04:56.68] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥७॥

[05:13.43] काज कियो बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो।

[05:21.43] कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसों नहिं जात है टारो।

[05:30.94] बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कुछ संकट होय हमारो।

[05:39.19] को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥

[00:00.00] दोहा

[00:00.00] लाल देह लाली लसे अरू धरि लाल लँगूर ।

[00:00.00] बज्र देह दानव दलन जय जय कपि सूर ॥

[00:00.00] सियावर रामचन्द्र पद गहि रहुँ ।

[00:00.00] उमावर शम्भुनाथ पद गहि रहुँ ।

[00:00.00] महावीर बजरँगी पद गहि रहुँ ।

[00:00.00] शरणा गतो हरि ॥