श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa I GULSHAN KUMAR I HARIHARAN_ Full HD Video_ Shree Hanuman Chalisa(MP3_320K)
[00:01.02] दोहा :
[00:03.28] श्रीगुरु चरन सरोज रज,
[00:08.73] निज मनु मुकुरु सुधारि।
[00:14.48] बरनऊं रघुबर बिमल जसु,
[00:19.75] जो दायकु फल चारि।।
[00:24.98] बुद्धिहीन तनु जानिके,
[00:30.48] सुमिरौं पवन-कुमार।
[00:36.50] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं,
[00:44.51] हरहु कलेस बिकार।।
[00:52.25] चौपाई :
[00:56.98] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
[01:02.49] जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
[01:07.47] रामदूत अतुलित बल धामा।
[01:12.99] अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
[01:23.74] महाबीर बिक्रम बजरंगी।
[01:29.24] कुमति निवार सुमति के संगी।।
[01:34.48] कंचन बरन बिराज सुबेसा।
[01:39.80] कानन कुंडल कुचित केसा।।
[01:44.99] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
[01:50.23] कांधे मूंज जनेऊ साजै।
[01:55.99] संकर सुवन केसरीनंदन।
[02:00.99] तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
[02:11.25] विद्यावान गुनी अति चातुर।
[02:16.91] राम काज करिबे को आतुर।।
[02:21.98] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
[02:27.25] राम लखन सीता मन बसिया।।
[02:32.75] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
[02:37.79] बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
[02:43.48] भीम रूप धरि असुर संहारे।
[02:48.58] रामचंद्र के काज संवारे।।
[02:58.75] लाय सजीवन लखन जियाये।
[03:04.24] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
[03:09.77] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
[03:14.74] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
[03:20.50] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
[03:25.96] अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
[03:30.97] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
[03:36.25] नारद सारद सहित अहीसा।।
[03:46.75] जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
[03:52.24] कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
[03:57.47] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
[04:04.50] राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
[04:08.33] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
[04:13.48] लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
[04:18.75] जुग सहस्र जोजन पर भानू।
[04:23.97] लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
[04:34.49] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
[04:39.81] जलधि लांघि गय अचरज नाहीं।।
[04:44.73] दुर्गम काज जगत के जेते।
[04:49.73] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
[04:55.48] राम दुआरे तुम रखवारे।
[05:00.77] होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
[05:06.23] सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
[05:11.76] तुम रक्षक काहू को डर ना।।
[05:22.48] आपन तेज सम्हारो आपै।
[05:27.49] तीनों लोक हांक तें कांपै।।
[05:32.96] भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
[05:37.25] महाबीर जब नाम सुनावै।।
[05:42.99] नासै रोग हरै सब पीरा।
[05:48.51] जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
[05:54.00] संकट तें हनुमान छुड़ावै।
[05:59.43] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
[06:09.99] सब पर राम तपस्वी राजा।
[06:15.23] तिन के काज सकल तुम साजा।
[06:20.51] और मनोरथ जो कोई लावै।
[06:25.48] सोइ अमित जीवन फल पावै।।
[06:31.24] चारों जुग परताप तुम्हारा।
[06:35.99] है परसिद्ध जगत उजियारा।।
[06:42.01] साधु-संत के तुम रखवारे।
[06:46.50] असुर निकंदन राम दुलारे।।
[06:57.23] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
[07:02.75] अस बर दीन जानकी माता।।
[07:07.74] राम रसायन तुम्हरे पासा।
[07:13.22] सदा रहो रघुपति के दासा।।
[07:18.24] तुम्हरे भजन राम को पावै।
[07:23.76] जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
[07:29.03] अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
[07:34.24] जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
[07:44.50] और देवता चित्त न धरई।
[07:50.48] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
[07:55.24] संकट कटै मिटै सब पीरा।
[08:00.25] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
[08:05.98] जै जै जै हनुमान गोसाईं।
[08:11.01] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
[08:16.25] जो सत बार पाठ कर कोई।
[08:21.26] छूटहि बंदि महा सुख होई।।
[08:31.77] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
[08:37.22] होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
[08:42.74] तुलसीदास सदा हरि चेरा।
[08:48.24] कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
[08:53.98] दोहा :
[09:00.97] पवन तनय संकट हरन,
[09:09.24] मंगल मूरति रूप।
[09:17.24] राम लखन सीता सहित,
[09:24.48] हृदय बसहु सुर भूप।।
