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[00:08.16] नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
[00:11.91] नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥
[00:16.91] निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
[00:22.16] तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
[00:00.00] शशि ललाट मुख महाविशाला ।
[00:00.00] नेत्र लाल भृकुटी बिकराला ॥
[00:00.00] रूप मातु को अधिक सुहावे ।
[00:00.00] दरश करत जन अति सुख पावे ॥
[00:00.00] तुम संसार शक्ति लय कीना ।
[00:00.00] पालन हेतु अन्न धन दीना ॥
[00:00.00] अन्नपूर्णा तुम जग पाला ।
[00:00.00] तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥
[00:00.00] प्रलयकाल सब नाशनहारी ।
[00:00.00] तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥
[00:00.00] शिव योगी तुम्हरे गुन गावें ।
[00:00.00] ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥
[00:00.00] रूप सरस्वती का तुम धारा ।
[00:00.00] दे सुबुधि ऋषि-मुनिन उबारा ॥
[00:00.00] धर्यो रूप नरसिंह को अम्बा ।
[00:00.00] परगट भईं फाड़ कर खम्बा ॥
[00:00.00] रक्षा करि प्रहलाद बचायो ।
[00:00.00] हिरनाकुश को स्वर्ग पठायो ॥
[00:00.00] लक्ष्मी रूप धरो जग जानी ।
[00:00.00] श्री नारायण अंग समानी ॥
[00:00.00] क्षीरसिन्धु में करत बिलासा ।
[00:00.00] दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥
[00:00.00] हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
[00:00.00] महिमा अमित न जात बखानी ॥
[00:00.00] मातंगी धूमावति माता ।
[00:00.00] भुवनेश्वरि बगला सुखदाता ॥
[00:00.00] श्री भैरव तारा जग-तारिणि ।
[00:00.00] छिन्न-भाल भव-दुःख निवारिणि ॥
[00:00.00] केहरि वाहन सोह भवानी ।
[00:00.00] लांगुर वीर चलत अगवानी ॥
[00:00.00] कर में खप्पर-खड्ग बिराजै ।
[00:00.00] जाको देख काल डर भाजै ॥
[00:00.00] सोहै अस्त्र विविध त्रिशूला ।
[00:00.00] जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥
[00:00.00] नगरकोट में तुम्हीं बिराजत ।
[00:00.00] तिहूँ लोक में डंका बाजत ॥
[00:00.00] शुम्भ निशुम्भ दैत्य तुम मारे ।
[00:00.00] रक्तबीज-संखन संहारे ॥
[00:00.00] महिषासुर दानव अभिमानी ।
[00:00.00] जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥
[00:00.00] रूप कराल कालिका धारा ।
[00:00.00] सेन सहित तुम तेहि संहारा ॥
[00:00.00] परी गाढ़ सन्तन पर जब-जब ।
[00:00.00] भई सहाय मातु तुम तब तब ॥
[00:00.00] अमर पुरी अरू बासव लोका ।
[00:00.00] तव महिमा सब रहें अशोका ॥
[00:00.00] ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
[00:00.00] तुम्हें सदा पूजें नर-नारी ॥
[00:00.00] प्रेम भक्ति से जो यश गावै ।
[00:00.00] दुख-दारिद्र निकट नहिं आवै ॥
[00:00.00] ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई ।
[00:00.00] जन्म-मरण ता कौ छुटि जाई ॥
[00:00.00] योगी सुर-मुनि कहत पुकारी ।
[00:00.00] योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥
[00:00.00] शंकर आचारज तप कीनो ।
[00:00.00] काम-क्रोध जीति तिन लीनो ॥
[00:00.00] निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
[00:00.00] अति श्रद्धा नहिं सुमिरो तुमको ॥
[00:00.00] शक्ति रूप को मरम न पायो ।
[00:00.00] शक्ति गई तब मन पछितायो ॥
[00:00.00] शरणागत ह्वै कीर्ति बखानी ।
[00:00.00] जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥
[00:00.00] भई प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
[00:00.00] दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥
[00:00.00] मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
[00:00.00] तुम बिन कौन हरे दुख मेरो ॥
[00:00.00] आशा तृष्णा निपट सतावैं ।
[00:00.00] मोह-मदादिक सब बिनसावैं ॥
[00:00.00] शत्रु नाश कीजै महरानी ।
[00:00.00] सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥
[00:00.00] करहु कृपा हे मातु दयाला ।
[00:00.00] ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला ॥
[00:00.00] जब लग जिओं दया फल पावौं ।
[00:00.00] तुम्हरो यश मैं सदा सुनावौं ॥
[00:00.00] दुर्गा चालीसा जो कोई गावै ।
[00:00.00] सब सुख भोग परमपद पावै ॥
[00:00.00] देवीदास शरण निज जानी ।
[00:00.00] करहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥
