Rudrashtskam
[00:11.45] नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
[00:23.86] निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥
[00:35.74] निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
[00:47.91] करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥
[01:00.01] तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं मनोभूतकोटिप्रभा श्रीशरीरम् ।
[01:12.15] स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥
[01:23.75] चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
[01:35.86] मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥ ४॥
[01:47.99] प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशमखण्डमजं भानुकोटिप्रकाशम् ।
[01:59.87] त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५॥
[02:11.99] कलातीतकल्याणकल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
[02:23.88] चिदानन्दसन्दोहमोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६॥
[02:35.77] न यावद् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
[02:47.93] न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७॥
[03:00.08] न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
[03:11.94] जराजन्मदुःखौघतातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८॥
[03:25.10] रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।
[03:33.15] ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥
[03:43.24] ॥ इति श्रीरामचरितमानसे उत्तरकाण्डे श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं
[03:46.76] श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥
