Hum Katha sunate Ram sakal gundham ki
[00:01.39] ॐ श्री महा गणाधि पते नमः
[00:10.31] ॐ श्री उमामहेश्वरा भ्या नमः
[00:22.09] वाल्मीकि गुरुदेव के
[00:28.60] कर पंकज तीर नाम
[00:34.38] सुमिरे मात सरस्वती
[00:40.39] हम पर हो हु सहाय
[00:50.17] मात पीता की वंदना
[00:56.18] करते बारंबार
[01:01.96] गुरुजन राजा प्रजाजन
[01:09.22] नमन करो स्वीकार
[01:20.24] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की
[01:27.26] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की
[01:34.27] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की
[01:49.32] जंबू द्वीपे, भरत खंडे, आर्यावरते
[01:56.09] भारत वर्षे एक नगरी है
[01:59.85] विख्यात अयोध्या नाम की
[02:04.37] यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की
[02:11.70] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की
[02:18.21] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की
[02:25.23] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की
[02:42.28] रघुकुल के राजा धरमात्मा
[02:47.04] चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा
[02:51.55] संतति हेतु यज्ञ करवाया
[02:56.06] धर्म यज्ञ का शुभफल पाया
[03:03.33] नृप घर जन्मे चार कुमारा
[03:09.12] रघुकुल दीप जगत आधारा
[03:17.38] चारों भ्रातो के शुभ नामा
[03:22.64] भरत शत्रुग्न लक्ष्मण रामा
[03:32.67] लिरिक्सबोगी.कॉम
[03:33.17] गुरु वशीष्ठ के गुरुकुल जाके
[03:35.18] अल्प काल विध्या सब पाके
[03:39.19] पुरन हुयी शिक्षा, रघुवर पुरन काम की
[03:45.70] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की
[03:52.46] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की
[04:07.01] म्रीदुस्वर कोमल भावना
[04:11.26] रोचक प्रस्तुति ढंग
[04:15.77] एक एक कर वर्णन करे
[04:20.78] लव कुश राम प्रसंग
[04:25.55] विश्वामित्र महामुनि राई
[04:29.85] इनके संग चले दो भाई
[04:36.86] कैसे राम तड़का मायी
[04:42.62] कैसे नाथ अहिल्या तारी
[04:48.39] मुनिवर विश्वामित्र तब
[04:52.90] संग ले लक्ष्मण राम
[04:57.66] सिया स्वयंवर देखने
[05:02.17] पहुचे मिथिला धाम
[05:14.95] जनकपुर उत्सव है भारी
[05:19.21] जनकपुर उत्सव है भारी
[05:25.47] अपने वर का चयन करेगी
[05:30.27] सीता सुकुमारी
[05:32.79] जनकपुर उत्सव है भारी
[05:38.82] जनक राज का कठिन प्रण
[05:43.58] सुनो सुनो सब कोई
[05:48.09] जो तोड़े शिव धनुष को
[05:53.10] सो सीता पति होई
[06:01.86] जो तोडे शिव धनुष कठोर
[06:02.40] सब की दृष्टि राम की ओर
[06:03.16] राम विनयगुण के अवतार
[06:04.16] गुरुवर की आज्ञा सिरद्धार
[06:06.92] सेहेज भाव से शिव धनु तोड़ा
[06:12.18] जनक सुता संग नाता जोड़ा
[06:20.50] रघुवर जैसा और ना कोई
[06:25.05] सीता की समता नहीं होई
[06:28.56] जो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की
[06:35.34] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की
[06:42.10] ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की
[06:58.39] सब पर शब्द मोहिनी डाली
[07:03.41] मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी
[07:07.67] यों दिन रैन जात है बीते
[07:12.48] लव कुश ने सब के मन जीते
[07:17.76] वन गमन, सीता हरन, हनुमत मिलन
[07:22.27] लंका दहेन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन
[07:30.82] सब विस्तार कथा सुनाई
[07:35.83] राजा राम भए रघुराई
[07:44.36] राम राज आयो सुख दायी
[07:49.62] सुख समृद्धि श्री घर घर आई
[07:57.63] काल चक्र में घटना क्रम में
[08:02.18] ऐसा चक्र चलाया
[08:06.43] राम सिया के जीवन में फिर
[08:11.44] घोर अंधेरा छाया
[08:34.99] अवध में ऐसा, ऐसा ऐक दिन आया
[08:43.00] निष्कलंक सीता पे प्रजा ने
[08:47.51] मिथ्या दोष लगाया
[08:58.03] अवध में ऐसा, ऐसा ऐक दिन आया
[09:01.07] चलदी सिया जब तोड़कर
[09:03.82] सब स्नेह-नाते मोह के
[09:07.83] पाषाण हृदयो में ना
[09:09.34] अंगारे जगे विद्रोह के
[09:14.14] ममतामयी माओ के
[09:16.42] आँचल भी सिमट कर रेह गए
[09:20.98] गुरुदेव ज्ञान और नीति के
[09:23.03] सागर भी घट कर रेह गए
[09:29.08] ना रघुकुल ना रघुकुल नायक
[09:35.85] कोई ना सिया का हुआ सहायक
[09:39.35] मानवता को खो बैठे जब
[09:45.36] सभ्य नगर के वासी
[09:50.12] तब सीता को हुआ सहायक
[09:57.39] वन का ऐक सन्यासी
[10:12.20] उन ऋषि परम उदार का
[10:17.50] वाल्मीकि शुभ नाम
[10:22.76] सीता को आश्रय दिया
[10:29.02] ले आए निज धाम
[10:36.82] रघुकुल में कुलदीप जलाए
[10:42.83] राम के दो सूत सियने जाये
[11:00.86] श्रोता गण जो एक राजा की पुत्री है
[11:04.38] एक राजा की पुत्रवधू हैं
[11:08.14] और एक चक्रवती सम्राट की पत्नी है
[11:09.39] वही महाराणी सीता
[11:10.65] वनवास के दुखो में
[11:12.16] अपने दिनो कैसे काटती हैं
[11:14.20] अपने कुल के गुरुवर और
[11:16.46] स्वाभिमान की रक्षा करते हुये
[11:18.79] किसी से सहायता मांगे बिना
[11:20.54] कैसे अपने काम वो स्वयं करती है
[11:22.79] स्वयं वन से लकड़ी काटती है
[11:25.04] स्वयं अपना धान कूटती है
[11:27.34] स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं
[11:29.59] और अपनी संतान को
[11:31.09] स्वावलंबन बनने की शिक्षा कैसे देती है
[11:34.85] अब उसकी करुण झांकी देखिये
[11:39.63] जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की
[11:43.88] राजा रानी हो के दिन वन में बिताती हैं
[11:50.15] रेहती थी घेरी जिसे दास-दासी आठो यम
[11:52.43] दासी बनी अपनी उदासी को छूपाती है
[12:00.69] धरम प्रवीन सती परम कुलिन सब
[12:04.46] विधि दोशहीन जीना दुख में सिखाती हैं
[12:08.97] जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया
[12:12.98] कूटती है धान भोज स्वयं बनाती है
[12:20.00] कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया कांटती है
[12:23.80] करम लिखेको पर काट नहीं पाती है
[12:30.32] फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था
[12:34.08] दुख भरी जीवन बोज वो उठाती है
[12:40.34] अर्धांगी ने रघुवीर की वो धरधीर
[12:44.85] भरति है नीर नीर जलमें नेहलाती है
[12:48.86] जिसके प्रजाके अपवादों कुचक्रा में
[12:52.62] वो पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाती है
[12:58.88] पालती है बच्चोकों वो कर्मयोगिनी के भाति
[13:02.68] स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनाती हैं
[13:06.43] ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते
[13:10.70] निठुर नियति को दया भी नहीं आती है
[13:18.71] ओ…उस दुखिया के राज-दुलारे
[13:29.74] हम ही सूत श्री राम तिहारे
[13:49.32] ओ सीता माँ की आँख के तारे ऐ
[13:57.58] लव-कुश है पितु नाम हमारे
[14:13.87] हे पितु भाग्य हमारे जागे
[14:20.17] राम कथा कही राम के आगे
