Lrc Player

Hum Katha sunate Ram sakal gundham ki

Anuradha Paudwal
[14:38.99]·Synced by Guest·
This lyric sheet isn't paired with a song yet, so lines are shown but won't sync or seek.

[00:01.39] ॐ श्री महा गणाधि पते नमः

[00:10.31] ॐ श्री उमामहेश्वरा भ्या नमः

[00:22.09] वाल्मीकि गुरुदेव के

[00:28.60] कर पंकज तीर नाम

[00:34.38] सुमिरे मात सरस्वती

[00:40.39] हम पर हो हु सहाय

[00:50.17] मात पीता की वंदना

[00:56.18] करते बारंबार

[01:01.96] गुरुजन राजा प्रजाजन

[01:09.22] नमन करो स्वीकार

[01:20.24] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

[01:27.26] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

[01:34.27] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

[01:49.32] जंबू द्वीपे, भरत खंडे, आर्यावरते

[01:56.09] भारत वर्षे एक नगरी है

[01:59.85] विख्यात अयोध्या नाम की

[02:04.37] यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की

[02:11.70] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

[02:18.21] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

[02:25.23] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

[02:42.28] रघुकुल के राजा धरमात्मा

[02:47.04] चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा

[02:51.55] संतति हेतु यज्ञ करवाया

[02:56.06] धर्म यज्ञ का शुभफल पाया

[03:03.33] नृप घर जन्मे चार कुमारा

[03:09.12] रघुकुल दीप जगत आधारा

[03:17.38] चारों भ्रातो के शुभ नामा

[03:22.64] भरत शत्रुग्न लक्ष्मण रामा

[03:32.67] लिरिक्सबोगी.कॉम

[03:33.17] गुरु वशीष्ठ के गुरुकुल जाके

[03:35.18] अल्प काल विध्या सब पाके

[03:39.19] पुरन हुयी शिक्षा, रघुवर पुरन काम की

[03:45.70] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

[03:52.46] ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

[04:07.01] म्रीदुस्वर कोमल भावना

[04:11.26] रोचक प्रस्तुति ढंग

[04:15.77] एक एक कर वर्णन करे

[04:20.78] लव कुश राम प्रसंग

[04:25.55] विश्वामित्र महामुनि राई

[04:29.85] इनके संग चले दो भाई

[04:36.86] कैसे राम तड़का मायी

[04:42.62] कैसे नाथ अहिल्या तारी

[04:48.39] मुनिवर विश्वामित्र तब

[04:52.90] संग ले लक्ष्मण राम

[04:57.66] सिया स्वयंवर देखने

[05:02.17] पहुचे मिथिला धाम

[05:14.95] जनकपुर उत्सव है भारी

[05:19.21] जनकपुर उत्सव है भारी

[05:25.47] अपने वर का चयन करेगी

[05:30.27] सीता सुकुमारी

[05:32.79] जनकपुर उत्सव है भारी

[05:38.82] जनक राज का कठिन प्रण

[05:43.58] सुनो सुनो सब कोई

[05:48.09] जो तोड़े शिव धनुष को

[05:53.10] सो सीता पति होई

[06:01.86] जो तोडे शिव धनुष कठोर

[06:02.40] सब की दृष्टि राम की ओर

[06:03.16] राम विनयगुण के अवतार

[06:04.16] गुरुवर की आज्ञा सिरद्धार

[06:06.92] सेहेज भाव से शिव धनु तोड़ा

[06:12.18] जनक सुता संग नाता जोड़ा

[06:20.50] रघुवर जैसा और ना कोई

[06:25.05] सीता की समता नहीं होई

[06:28.56] जो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की

[06:35.34] हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

[06:42.10] ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की

[06:58.39] सब पर शब्द मोहिनी डाली

[07:03.41] मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी

[07:07.67] यों दिन रैन जात है बीते

[07:12.48] लव कुश ने सब के मन जीते

[07:17.76] वन गमन, सीता हरन, हनुमत मिलन

[07:22.27] लंका दहेन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन

[07:30.82] सब विस्तार कथा सुनाई

[07:35.83] राजा राम भए रघुराई

[07:44.36] राम राज आयो सुख दायी

[07:49.62] सुख समृद्धि श्री घर घर आई

[07:57.63] काल चक्र में घटना क्रम में

[08:02.18] ऐसा चक्र चलाया

[08:06.43] राम सिया के जीवन में फिर

[08:11.44] घोर अंधेरा छाया

[08:34.99] अवध में ऐसा, ऐसा ऐक दिन आया

[08:43.00] निष्कलंक सीता पे प्रजा ने

[08:47.51] मिथ्या दोष लगाया

[08:58.03] अवध में ऐसा, ऐसा ऐक दिन आया

[09:01.07] चलदी सिया जब तोड़कर

[09:03.82] सब स्नेह-नाते मोह के

[09:07.83] पाषाण हृदयो में ना

[09:09.34] अंगारे जगे विद्रोह के

[09:14.14] ममतामयी माओ के

[09:16.42] आँचल भी सिमट कर रेह गए

[09:20.98] गुरुदेव ज्ञान और नीति के

[09:23.03] सागर भी घट कर रेह गए

[09:29.08] ना रघुकुल ना रघुकुल नायक

[09:35.85] कोई ना सिया का हुआ सहायक

[09:39.35] मानवता को खो बैठे जब

[09:45.36] सभ्य नगर के वासी

[09:50.12] तब सीता को हुआ सहायक

[09:57.39] वन का ऐक सन्यासी

[10:12.20] उन ऋषि परम उदार का

[10:17.50] वाल्मीकि शुभ नाम

[10:22.76] सीता को आश्रय दिया

[10:29.02] ले आए निज धाम

[10:36.82] रघुकुल में कुलदीप जलाए

[10:42.83] राम के दो सूत सियने जाये

[11:00.86] श्रोता गण जो एक राजा की पुत्री है

[11:04.38] एक राजा की पुत्रवधू हैं

[11:08.14] और एक चक्रवती सम्राट की पत्नी है

[11:09.39] वही महाराणी सीता

[11:10.65] वनवास के दुखो में

[11:12.16] अपने दिनो कैसे काटती हैं

[11:14.20] अपने कुल के गुरुवर और

[11:16.46] स्वाभिमान की रक्षा करते हुये

[11:18.79] किसी से सहायता मांगे बिना

[11:20.54] कैसे अपने काम वो स्वयं करती है

[11:22.79] स्वयं वन से लकड़ी काटती है

[11:25.04] स्वयं अपना धान कूटती है

[11:27.34] स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं

[11:29.59] और अपनी संतान को

[11:31.09] स्वावलंबन बनने की शिक्षा कैसे देती है

[11:34.85] अब उसकी करुण झांकी देखिये

[11:39.63] जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की

[11:43.88] राजा रानी हो के दिन वन में बिताती हैं

[11:50.15] रेहती थी घेरी जिसे दास-दासी आठो यम

[11:52.43] दासी बनी अपनी उदासी को छूपाती है

[12:00.69] धरम प्रवीन सती परम कुलिन सब

[12:04.46] विधि दोशहीन जीना दुख में सिखाती हैं

[12:08.97] जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया

[12:12.98] कूटती है धान भोज स्वयं बनाती है

[12:20.00] कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया कांटती है

[12:23.80] करम लिखेको पर काट नहीं पाती है

[12:30.32] फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था

[12:34.08] दुख भरी जीवन बोज वो उठाती है

[12:40.34] अर्धांगी ने रघुवीर की वो धरधीर

[12:44.85] भरति है नीर नीर जलमें नेहलाती है

[12:48.86] जिसके प्रजाके अपवादों कुचक्रा में

[12:52.62] वो पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाती है

[12:58.88] पालती है बच्चोकों वो कर्मयोगिनी के भाति

[13:02.68] स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनाती हैं

[13:06.43] ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते

[13:10.70] निठुर नियति को दया भी नहीं आती है

[13:18.71] ओ…उस दुखिया के राज-दुलारे

[13:29.74] हम ही सूत श्री राम तिहारे

[13:49.32] ओ सीता माँ की आँख के तारे ऐ

[13:57.58] लव-कुश है पितु नाम हमारे

[14:13.87] हे पितु भाग्य हमारे जागे

[14:20.17] राम कथा कही राम के आगे