श्री हनुमान चालीसा Shree Hanuman Chalisa I GULSHAN KUMAR I HARIHARAN I Morning Hanuman Ji Ka Bhajan
[00:02.05] श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सूधारि।
[00:13.78] बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
[00:24.53] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
[00:36.04] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥
[00:56.79] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
[01:02.05] जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ १ ॥
[01:07.55] राम दूत अतुलित बल धामा।
[01:12.55] अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ २ ॥
[01:23.28] महावीर विक्रम बजरंगी।
[01:29.03] कुमति निवार सुमति के संगी॥ ३ ॥
[01:34.03] कंचन बरन बिराज सुबेसा।
[01:39.57] कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ४ ॥
[01:44.79] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
[01:50.06] काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ ५ ॥
[01:55.28] शंकर सुवन केसरी नंदन।
[02:00.77] तेज प्रताप महा जग बंदन॥ ६ ॥
[02:10.81] विद्यावान गुनी अति चातुर।
[02:16.55] राम काज करिबे को आतुर॥ ७ ॥
[02:21.79] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
[02:27.04] राम लखन सीता मन बसिया॥ ८ ॥
[02:32.28] सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा।
[02:37.54] बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ ९ ॥
[02:43.04] भीम रूप धरि असुर सँहारे।
[02:47.80] रामचन्द्र के काज सँवारे॥ १० ॥
[02:58.78] लाय सँजीवनि लखन जियाए।
[03:04.27] श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ ११ ॥
[03:09.54] रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।
[03:14.54] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ १२ ॥
[03:19.80] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
[03:25.05] अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ १३ ॥
[03:30.28] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
[03:35.54] नारद सारद सहित अहीसा॥ १४ ॥
[03:46.30] जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते।
[03:51.79] कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥ १५ ॥
[03:57.04] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
[04:02.28] राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ १६ ॥
[04:07.53] तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना।
[04:12.78] लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ १७ ॥
[04:18.54] जुग सहस्र जोजन पर भानू।
[04:23.53] लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ १८ ॥
[04:34.05] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
[04:39.79] जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ १९ ॥
[04:44.80] दुर्गम काज जगत के जेते ।
[04:49.55] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ २० ॥
[04:55.28] राम दुआरे तुम रखवारे।
[05:00.03] होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ २१ ॥
[05:06.03] सब सुख लहै तुम्हारी शरना।
[05:11.30] तुम रक्षक काहू को डरना॥ २२ ॥
[05:21.53] आपन तेज सम्हारो आपै।
[05:27.29] तीनौं लोक हाँक ते काँपे॥ २३ ॥
[05:32.54] भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
[05:37.79] महाबीर जब नाम सुनावै॥ २४ ॥
[05:42.80] नासै रोग हरै सब पीरा।
[05:48.55] जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ २५ ॥
[05:53.52] संकट तें हनुमान छुड़ावै।
[05:58.79] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ २६ ॥
[06:09.54] सब पर राम तपस्वी राजा।
[06:15.04] तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥
[06:20.05] और मनोरथ जो कोई लावै।
[06:25.27] सोहि अमित जीवन फल पावै॥ २८ ॥
[06:30.52] चारों जुग परताप तुम्हारा।
[06:36.04] है परसिद्ध जगत उजियारा॥ २९ ॥
[06:41.29] साधु संत के तुम रखवारे।
[06:46.55] असुर निकंदन राम दुलारे॥ ३० ॥
[06:56.79] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
[07:02.54] अस बर दीन्ह जानकी माता॥ ३१ ॥
[07:07.54] राम रसायन तुम्हरे पासा।
[07:12.28] सदा रहो रघुपति के दासा॥ ३२ ॥
[07:17.80] तुम्हरे भजन राम को पावै।
[07:22.78] जनम जनम के दुख बिसरावै॥ ३३ ॥
[07:28.53] अंत काल रघुबर पुर जाई।
[07:33.56] जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥ ३४ ॥
[07:44.53] और देवता चित्त न धरई।
[07:49.53] हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ ३५ ॥
[07:54.77] संकट कटै मिटै सब पीरा।
[07:59.79] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ ३६ ॥
[08:05.31] जय जय जय हनुमान गोसाईं।
[08:10.55] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ ३७ ॥
[08:16.04] जो शत बार पाठ कर कोई।
[08:21.05] छूटहि बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥
[08:31.28] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
[08:37.03] होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ ३९ ॥
[08:42.03] तुलसीदास सदा हरि चेरा।
[08:47.28] कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ४० ॥
[09:01.03] पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
[09:17.80] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥
