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Shankat Mochan Hanuman Ashtak

Unknown artist
[06:57.28]·Synced by Guest·
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[00:07.44] बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों

[00:16.66] ताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो

[00:26.51] देवन आनि करी विनती तब, छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो

[00:37.05] को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो, को – ॥१॥

[00:57.70] बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो

[01:07.55] चौंकि महामुनि शाप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो

[01:17.35] कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो, – को ॥२॥

[01:46.40] अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीश यह बैन उचारो

[01:55.14] जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो

[02:05.64] हेरी थके तट सिन्धु सबै तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो,- को ॥३॥

[02:37.30] रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षसि सो कही सोक निवारो

[02:46.77] ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मारो

[02:56.57] चाहत सीय असोक सों आगिसु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो, -को ॥४॥

[03:25.38] बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावन मारो

[03:34.95] लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो

[03:44.22] आनि संजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो, – को ॥५॥

[04:16.00] रावन युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो

[04:25.15] श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो

[04:35.42] आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो,- को ॥६॥

[05:04.00] बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो

[05:14.03] देवहिं पूजि भली विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो

[05:23.55] जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो,- को ॥७॥

[05:55.39] काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो

[06:04.69] कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसो नहिं जात है टारो

[06:14.48] बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो,- को ॥८॥