Shree Ram Janki
[00:19.75] नहीं चलाओ बाण व्यंग के ऐह विभीषण
[00:26.41] ताना ना सेह पाऊं, क्यों तोड़ी है यह माला,
[00:34.38] तुझे ए लंकापति बतलाऊं
[00:40.75] मुझ में भी है तुझ में भी है, सब में है समझाऊं
[01:06.79] ऐ लंका पति विभीषण ले देख मैं तुझ को आज दिखाऊं
[01:29.17] - जय श्री राम -
[01:39.26] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
[02:16.45] देख लो मेरे मन के नागिनें में ।
[03:04.79] मुझ को कीर्ति न वैभव न यश चाहिए,
[03:09.58] राम के नाम का मुझ को रस चाहिए ।
[03:36.94] सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,
[03:51.28] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥
[04:30.60] अनमोल कोई भी चीज मेरे काम की नहीं
[04:31.84] दिखती अगर उसमे छवि सिया राम की नहीं
[04:32.37] राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरन करू,
[05:19.13] सिया राम का सदा ही मै चिंतन करू ।
[05:25.77] सच्चा आंनंद है ऐसे जीने में श्री राम,
[05:39.31] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥
[06:18.89] फाड़ सीना हैं सब को यह दिखला दिया,
[06:23.51] भक्ति में हैं मस्ती बेधड़क दिखला दिया ।
[06:51.14] कोई मस्ती ना सागर मीने में,
[07:04.89] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥
