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Shree Ram Janki

Lakhbir Singh Lakkha
[08:32.21]·
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[00:19.75] नहीं चलाओ बाण व्यंग के ऐह विभीषण

[00:26.41] ताना ना सेह पाऊं, क्यों तोड़ी है यह माला,

[00:34.38] तुझे ए लंकापति बतलाऊं

[00:40.75] मुझ में भी है तुझ में भी है, सब में है समझाऊं

[01:06.79] ऐ लंका पति विभीषण ले देख मैं तुझ को आज दिखाऊं

[01:29.17] - जय श्री राम -

[01:39.26] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,

[02:16.45] देख लो मेरे मन के नागिनें में ।

[03:04.79] मुझ को कीर्ति न वैभव न यश चाहिए,

[03:09.58] राम के नाम का मुझ को रस चाहिए ।

[03:36.94] सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,

[03:51.28] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥

[04:30.60] अनमोल कोई भी चीज मेरे काम की नहीं

[04:31.84] दिखती अगर उसमे छवि सिया राम की नहीं

[04:32.37] राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरन करू,

[05:19.13] सिया राम का सदा ही मै चिंतन करू ।

[05:25.77] सच्चा आंनंद है ऐसे जीने में श्री राम,

[05:39.31] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥

[06:18.89] फाड़ सीना हैं सब को यह दिखला दिया,

[06:23.51] भक्ति में हैं मस्ती बेधड़क दिखला दिया ।

[06:51.14] कोई मस्ती ना सागर मीने में,

[07:04.89] श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥