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Neel_Saraswati_Stotram_(getmp3.pro)

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[00:00.04] ॥ श्री नीलसरस्वती स्तोत्रम् ॥

[00:22.91] घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि।

[00:33.26] भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥१॥

[00:50.53] ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।

[01:01.70] जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥२॥

[01:18.95] जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।

[01:30.12] द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥३॥

[01:47.37] सौम्यक्रोधधरे रुपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते।

[01:58.54] सृष्टिरुपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥४॥

[02:15.54] जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।

[02:26.96] मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥५॥

[02:43.95] वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः।

[02:55.37] उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥६॥

[03:12.11] बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।

[03:23.79] मूढ़त्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥७॥

[03:40.80] इन्द्रादिविलसद्द्वन्द्ववन्दिते करुणामयि।

[03:52.23] तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणागतम् ॥८॥

[04:09.22] अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां यः पठेन्नरः।

[04:20.37] षण्मासैः सिद्धिमाप्नोति नात्र कार्या विचारणाम् ॥९॥

[04:37.64] मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।

[04:48.80] विद्यार्थी लभते विद्यां तर्कव्याकरणादिकम् ॥१०॥

[05:05.80] इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाऽन्वितः।

[05:17.22] तस्य शत्रुः क्षयं याति महाप्रज्ञा प्रजायते ॥११॥

[05:34.22] पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये।

[05:45.90] य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशयः ॥१२॥

[05:58.39] इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनिमुद्रां प्रदर्शयेत् ॥१३॥