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shiv sama rahe

Hansraj Raghuvanshi
[05:33.46]·
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[00:17.90] शिव समा रहे मुझमें,

[00:20.91] और मैं शून्य हो रहा हूँ।

[00:30.31] शिव समा रहे मुझमें,

[00:33.35] और मैं शून्य हो रहा हूँ।

[00:43.15] क्रोध को लोभ को, क्रोध को लोभ को,

[00:51.21] मैं भस्म कर रहा हूँ।

[01:01.82] शिव समा रहे मुझमें,

[01:04.84] और मैं शून्य हो रहा हूँ।

[01:10.89] ॐ नमः शिवाय

[01:14.41] शिव समा रहे मुझमें,

[01:17.43] और मैं शून्य हो रहा हूँ।

[01:23.24] ॐ नमः शिवाय

[02:00.95] तेरी बनाई दुनिया में,

[02:04.76] कोई तुझ सा मिला नहीं।

[02:09.03] मैं तो भटका दरबदर,

[02:12.04] कोई किनारा मिला नहीं।

[02:17.84] जितना पास तुझको पाया,

[02:21.61] उतना खुद से दूर जा रहा हूँ।

[02:29.91] शिव समा रहे मुझमें,

[02:32.18] और मैं शून्य हो रहा हूँ।

[02:39.25] ॐ नमः शिवाय

[03:12.19] मैने खुद को खुद ही बाँधा,

[03:16.71] अपनी खींची लकीरों में।

[03:20.50] मैं लिपट चुका था,

[03:24.53] इच्छा की ज़ंजीरों में।

[03:33.37] अनंत की गहराइयों में,

[03:37.15] समय से दूर हो रहा हूँ।

[03:43.74] शिव प्राणों में उतर रहे,

[03:50.04] और मैं मुक्त हो रहा हूँ।

[04:12.44] शिव समा रहे मुझमें,

[04:12.94] और मैं शून्य हो रहा हूँ।

[04:13.44] वो सुबह की पहली किरण में,

[04:13.94] वो कस्तूरी वन के हिरण में।

[04:14.45] मेघों में गरजे गूँजे गगन में,

[04:14.98] रमता जोगी, रमता गगन में।

[04:19.01] वो ही वायु में, वो ही आयु में,

[04:19.51] वो जिस्म में वो ही रूह में,

[04:22.53] वो ही छाया में वो ही धूप में,

[04:25.32] वो ही हैं हर एक रूप में।

[04:29.85] ओ भोले ओ

[04:44.98] क्रोध को लोभ को, क्रोध को लोभ को

[04:52.29] मैं भस्म कर रहा हूँ।

[05:03.38] शिव समा रहे मुझमें,

[05:06.91] और मैं शून्य हो रहा हूँ।

[05:11.95] ॐ नमः शिवाय