Bajarang baan
[00:01.98] दोहा
[00:02.52] निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
[00:15.00] तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
[00:24.31] चौपाई
[00:31.49] जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
[00:42.63] जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
[00:58.31] जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
[01:09.74] आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
[01:19.57] जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
[01:30.47] बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
[01:46.40] अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
[01:56.76] लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
[02:07.12] अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
[02:18.30] जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
[02:33.61] जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
[02:44.42] ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
[02:54.87] ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
[03:05.75] जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
[03:21.16] बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
[03:32.04] भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
[03:42.67] इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
[03:53.55] सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
[04:08.96] जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
[04:19.87] पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
[04:30.23] बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
[04:41.10] जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
[04:56.78] जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
[05:07.39] चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
[05:17.88] उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
[05:28.76] ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
[05:44.44] ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
[05:55.07] अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
[06:05.97] यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
[06:16.34] पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
[06:32.11] यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
[06:42.74] धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥
[07:01.81] दोहा
[07:03.81] उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
[07:17.76] बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥
