Hanuman Chalisa
[00:25.37] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
[00:27.49] बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
[00:28.82] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
[00:29.62] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
[00:30.95] ॥ चौपाई ॥
[00:33.60] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
[00:33.86] जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
[00:34.66] रामदूत अतुलित बल धामा।
[00:34.94] अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
[00:36.52] महाबीर बिक्रम बजरंगी।
[00:37.06] कुमति निवार सुमति के संगी॥
[00:37.85] कंचन बरन बिराज सुबेसा।
[00:38.39] कानन कुंडल कुंचित केसा॥
[00:39.45] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
[00:39.97] कांधे मूंज जनेऊ साजै॥
[00:40.51] संकर सुवन केसरीनंदन।
[00:41.30] तेज प्रताप महा जग बन्दन॥
[00:42.36] विद्यावान गुनी अति चातुर।
[00:42.90] राम काज करिबे को आतुर॥
[00:43.43] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
[00:43.96] राम लखन सीता मन बसिया॥
[00:45.03] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
[00:45.56] बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
[00:46.09] भीम रूप धरि असुर संहारे।
[00:46.35] रामचंद्र के काज संवारे॥
[00:47.42] लाय सजीवन लखन जियाये।
[00:47.95] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
[00:48.48] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
[00:48.74] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
[00:50.08] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
[00:50.34] अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
[00:51.13] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
[00:51.40] नारद सारद सहित अहीसा॥
[00:52.20] जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
[00:52.73] कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥
[00:53.79] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
[00:54.59] राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
[00:55.11] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
[00:55.65] लंकेस्वर भए सब जग जाना॥
[00:56.18] जुग सहस्र जोजन पर भानू।
[00:56.72] लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
[00:58.84] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
[00:59.10] जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥
[01:00.43] दुर्गम काज जगत के जेते।
[01:00.70] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
[01:01.49] राम दुआरे तुम रखवारे।
[01:02.03] होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
[01:03.09] सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
[01:03.62] तुम रक्षक काहू को डर ना॥
[01:04.68] आपन तेज सम्हारो आपै।
[01:04.94] तीनों लोक हांक तें कांपै॥
[01:06.01] भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
[01:06.54] महाबीर जब नाम सुनावै॥
[01:07.07] नासै रोग हरै सब पीरा।
[01:07.60] जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
[01:08.40] संकट तें हनुमान छुड़ावै।
[01:08.93] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
[01:09.47] सब पर राम तपस्वी राजा।
[01:09.73] तिन के काज सकल तुम साजा॥
[01:10.79] और मनोरथ जो कोई लावै।
[01:11.06] सोइ अमित जीवन फल पावै॥
[01:11.86] चारों जुग परताप तुम्हारा।
[01:12.12] है परसिद्ध जगत उजियारा॥
[01:12.91] साधु-संत के तुम रखवारे।
[01:13.44] असुर निकंदन राम दुलारे॥
[01:14.51] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
[01:15.04] अस बर दीन जानकी माता॥
[01:15.57] राम रसायन तुम्हरे पासा।
[01:16.11] सदा रहो रघुपति के दासा॥
[00:00.00] तुम्हरे भजन राम को पावै।
[00:00.00] जनम-जनम के दुख बिसरावै॥
[00:00.00] अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
[00:00.00] जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥
[00:00.00] और देवता चित्त न धरई।
[00:00.00] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
[00:00.00] संकट कटै मिटै सब पीरा।
[00:00.00] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
[00:00.00] जै जै जै हनुमान गोसाईं।
[00:00.00] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
[00:00.00] जो सत बार पाठ कर कोई।
[00:00.00] छूटहि बंदि महा सुख होई॥
[00:00.00] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
[00:00.00] होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
[00:00.00] तुलसीदास सदा हरि चेरा।
[00:00.00] कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥
[00:00.00] ॥ दोहा ॥
[00:00.00] पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
[00:00.00] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥
