shri damodarastkam
[00:01.00] नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं
[00:09.49] लसत्-कुण्डलं गोकुले भ्राजमनम्
[00:18.26] यशोदा-भियोलूखलाद् धावमानं
[00:27.56] परामृष्टम् अत्यन्ततो द्रुत्य गोप्या ॥ १॥
[01:24.13] रुदन्तं मुहुर् नेत्र-युग्मं मृजन्तम्
[01:29.72] कराम्भोज-युग्मेन सातङ्क-नेत्रम्
[01:34.76] मुहुः श्वास-कम्प-त्रिरेखाङ्क-कण्ठ
[01:40.60] स्थित-ग्रैवं दामोदरं भक्ति-बद्धम् ॥ २॥
[02:08.23] इतीदृक् स्व-लीलाभिर् आनन्द-कुण्डे
[02:13.28] स्व-घोषं निमज्जन्तम् आख्यापयन्तम्
[02:18.85] तदीयेषित-ज्ञेषु भक्तैर् जितत्वं
[02:24.16] पुनः प्रेमतस् तं शतावृत्ति वन्दे ॥ ३॥
[02:51.26] वरं देव मोक्षं न मोक्षावधिं वा
[02:56.31] न चन्यं वृणे ‘हं वरेषाद् अपीह
[03:01.10] इदं ते वपुर् नाथ गोपाल-बालं
[03:06.40] सदा मे मनस्य् आविरास्तां किम् अन्यैः ॥ ४॥
[03:32.96] इदं ते मुखाम्भोजम् अत्यन्त-नीलैर्
[03:37.74] वृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश् च गोप्या
[03:43.06] मुहुश् चुम्बितं बिम्ब-रक्ताधरं मे
[03:48.90] मनस्य् आविरास्ताम् अलं लक्ष-लाभैः ॥ ५॥
[04:15.20] नमो देव दामोदरानन्त विष्णो
[04:19.18] प्रसीद प्रभो दुःख-जालाब्धि-मग्नम्
[04:25.29] कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति-दीनं बतानु
[04:31.13] गृहाणेष माम् अज्ञम् एध्य् अक्षि-दृश्यः ॥ ६॥
[04:56.63] कुवेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्
[05:01.68] त्वया मोचितौ भक्ति-भाजौ कृतौ च
[05:06.46] तथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ
[05:11.77] न मोक्षे ग्रहो मे ‘स्ति दामोदरेह ॥ ७॥
[05:37.28] नमस् तेस्तु दाम्ने स्फुरद्-दीप्ति-धाम्ने
[05:43.12] त्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्ने
[05:47.90] नमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायै
[05:52.95] नमो ‘नन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ ८॥
