Bajrang Baan - Hariharan
[00:03.06] "निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।"
[00:14.81] "तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥"
[00:25.42] "चौपाई"
[00:32.60] जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।
[00:42.96] जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।।
[00:58.90] जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
[01:09.27] आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
[01:19.63] जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।
[00:00.00] बाग़ उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।
[00:00.00] अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।
[00:00.00] लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर में भई।।
[00:00.00] अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।
[00:00.00] जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।
[00:00.00] जै गिरिधर जै जै सुखसागर। सुर समूह समरथ भटनागर।।
[00:00.00] ॐ हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिंं मारु बज्र की कीले।।
[00:00.00] गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।
[00:00.00] ऊँकार हुंकार प्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।
[00:00.00] ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ऊँ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा।।
[00:00.00] सत्य होहु हरि शपथ पाय के। रामदूत धरु मारु जाय के।।
[00:00.00] जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
[00:00.00] पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।
[00:00.00] वन उपवन, मग गिरिगृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
[00:00.00] पांय परों कर ज़ोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
[00:00.00] जय अंजनिकुमार बलवन्ता। शंकरसुवन वीर हनुमन्ता।।
[00:00.00] बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।
[00:00.00] भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।
[00:00.00] इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की।।
[00:00.00] जनकसुता हरिदास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।
[00:00.00] जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।
[00:00.00] चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
[00:00.00] उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परों कर ज़ोरि मनाई।।
[00:00.00] ॐ चं चं चं चं चपत चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता।।
[00:00.00] ऊँ हँ हँ हांक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।
[00:00.00] अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।
[00:00.00] यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।
[00:00.00] पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
[00:00.00] यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब काँपै।।
[00:00.00] धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।
[00:00.00] "दोहा"
[00:00.00] " प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान। "
[00:00.00] " तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान।। "
