Sankat mochan
[00:00.26] ॥ हनुमानाष्टक ॥
[00:07.23] बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
[00:11.81] तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
[00:16.65] ताहि सों त्रास भयो जग को,
[00:21.17] यह संकट काहु सों जात न टारो ।
[00:26.48] देवन आनि करी बिनती तब,
[00:31.80] छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
[00:37.37] को नहीं जानत है जग में कपि,
[00:44.27] संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥
[00:58.08] बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
[01:02.60] जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
[01:07.92] चौंकि महामुनि साप दियो तब,
[01:12.43] चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
[01:17.21] कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
[01:22.26] सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥
[01:46.43] अंगद के संग लेन गए सिय,
[01:50.69] खोज कपीस यह बैन उचारो ।
[01:55.99] जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
[02:00.51] बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
[02:05.55] हेरी थके तट सिन्धु सबे तब,
[02:10.33] लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥
[02:37.72] रावण त्रास दई सिय को सब,
[02:43.03] राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
[02:47.02] ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
[02:51.27] जाए महा रजनीचर मरो ।
[02:56.31] चाहत सीय असोक सों आगि सु,
[03:01.09] दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥
[03:25.28] बान लाग्यो उर लछिमन के तब,
[03:30.07] प्राण तजे सूत रावन मारो ।
[03:34.84] लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
[03:39.66] तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
[03:44.44] आनि सजीवन हाथ दिए तब,
[03:49.53] लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥
[04:16.10] रावन जुध अजान कियो तब,
[04:20.64] नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
[04:25.73] श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
[04:30.50] मोह भयो यह संकट भारो I
[04:35.28] आनि खगेस तबै हनुमान जु,
[04:40.60] बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥
[05:04.24] बंधू समेत जबै अहिरावन,
[05:09.28] लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
[05:14.07] देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि,
[05:19.11] देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
[05:23.63] जाये सहाए भयो तब ही,
[05:28.14] अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥
[05:55.12] काज किये बड़ देवन के तुम,
[05:59.92] बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
[06:04.70] कौन सो संकट मोर गरीब को,
[06:09.48] जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
[06:14.26] बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
[06:21.17] जो कछु संकट होए हमारो ॥ ८ ॥
[00:00.00] ॥ दोहा ॥
[00:00.00] लाल देह लाली लसे,
[00:00.00] अरु धरि लाल लंगूर ।
[00:00.00] वज्र देह दानव दलन,
[00:00.00] जय जय जय कपि सूर ॥
