Ram_Darshan_Ram_Setu_EP_Narci_Hindi_Rap_Song_7PgQVzrkKvk_140
[00:23.63] पता नहीं किस रूप में आकर,
[00:26.56] नारायण मिल जायेगा,
[00:29.76] निर्मल मन के दर्पण में,
[00:32.15] वह राम के दर्शन पायेगा,
[00:35.33] पता नहीं किस रूप में,
[00:37.73] आकर नारायण मिल जायेगा,
[00:41.71] निर्मल मन के दर्पण में,
[00:44.10] वह राम के दर्शन पायेगा।
[00:47.29] पता नहीं किस रूप में आकर,
[00:50.47] नारायण मिल जायेगा,
[00:53.40] निर्मल मन के दर्पण में,
[00:56.32] वह राम के दर्शन पायेगा।
[00:59.51] सांस रुकी तेरे दर्शन को,
[01:00.83] न दुनिया में मेरा लगता मन,
[01:02.43] शबरी बनके बैठा हूं मैं,
[01:03.76] श्री राम में अटका मन,
[01:05.38] बेकरार मेरे दिल को मैं,
[01:06.98] कितना भी समझा लूं,
[01:08.60] राम दर्श के बाद,
[01:09.93] दिल छोड़ेगा ये धड़कन,
[01:11.52] काले युग का प्राणी हूं,
[01:12.85] पर जीता हूं मैं त्रेतायुग,
[01:14.44] कर्ता हूं महसुस पलों को,
[01:15.77] माना ना वो देखा युग,
[01:17.37] देगा युग कलि का ये,
[01:18.96] पापों के उपहार कई,
[01:20.29] छंद मेरा पर गाने का,
[01:21.89] हर प्राणी को देगा सुख,
[01:23.48] हरि कथा का वक्ता हूं मैं,
[01:25.07] राम भजन की आदत,
[01:26.40] राम आभारी शायर,
[01:28.26] मिल जो रही है दावत,
[01:29.59] हरि कथा सुना के मैं,
[01:30.93] छोड़ तुम्हें कल जाऊंगा,
[01:32.26] बाद मेरे ना गिरने देना,
[01:34.15] हरि कथा विरासत,
[01:35.48] पाने को दीदार प्रभु के,
[01:37.07] नैन बड़े ये तरसे है,
[01:38.40] जान सके ना कोई वेदना,
[01:40.01] रातों को ये बरसे है,
[01:41.33] किसे पता किस मौके पे,
[01:42.93] किस भूमि पे किस कोने में,
[01:44.26] मेले में या वीराने में,
[01:45.85] श्री हरि हमें दर्शन दे।
[01:47.48] पता नहीं किस रूप में आकर,
[01:50.40] नारायण मिल जायेगा,
[01:54.38] निर्मल मन के दर्पण में,
[01:56.25] वह राम के दर्शन पायेगा,
[01:59.18] पता नहीं किस रूप में आकर,
[02:02.37] नारायण मिल जायेगा,
[02:05.56] निर्मल मन के दर्पण में,
[02:08.22] वह राम के दर्शन पायेगा।
[02:11.66] पता नहीं किस रूप में आकर,
[02:17.24] पता नहीं किस रूप में आकर,
[02:23.38] पता नहीं किस रूप में आकर,
[02:29.22] पता नहीं किस रूप में आकर,
[02:35.35] इंतजार में बैठा हूं,
[02:36.68] कब बीतेगा ये काला युग,
[02:38.55] बीतेगी ये पीड़ा और,
[02:39.88] भारी दिल के सारे दुख,
[02:41.21] मिलने को हूं बेकरार पर,
[02:42.82] पापों का मैं भागी भी,
[02:44.42] नज़रें मेरी आगे तेरे,
[02:45.74] श्री हरि जायेगी झुक,
[02:47.33] राम नाम से जुड़े हैं ऐसे,
[02:48.93] खुद से भी ना मिल पाये,
[02:50.25] कोई ना जाने किस चेहरे में,
[02:52.12] राम हमें कल मिल जाये,
[02:53.44] वैसे तो मेरे दिल में हो पर,
[02:54.78] आंखें प्यासी दर्शन की,
[02:56.36] शाम सवेरे सारे मौसम,
[02:57.99] राम गीत ही दिल गए,
[03:00.11] रघुवीर ये विनती है तुम,
[03:01.18] दूर करो अंधेरों को,
[03:02.50] दूर करो परेशानी के,
[03:04.10] सारे भुखे शेरों को,
[03:05.43] शबरी बनके बैठा पर,
[03:07.05] काले युग का प्राणी हूं,
[03:08.39] मैं जूठा भी ना कर पाऊंगा,
[03:09.97] पापी मुंह से बेरो को,
[03:11.57] बन चुका बैरागी दिल,
[03:12.90] नाम तेरा ही लेता है,
[03:14.23] शायर अपनी सांसें ये,
[03:15.87] राम सिया को देता है,
[03:18.26] और नहीं इच्छा है अब,
[03:19.05] जीने की मेरी राम यहां,
[03:20.38] बाद मुझे मेरी मौत के,
[03:21.71] बस ले जाना तुम त्रेता में।
[03:24.36] त्रेता में
[03:24.90] त्रेता में
[03:25.43] त्रेता में
[03:25.97] त्रेता में
[03:26.76] त्रेता में
[03:29.68] राम के चरित्र में
[03:30.74] सबको अपने घर का
[03:32.34] अपने कष्टों का
[03:33.66] एक जवान मिलता है
[03:35.79] पता नहीं किस रूप में आकर,
[03:38.44] नारायण मिल जायेगा,
[03:41.40] निर्मल मन के दर्पण में,
[03:43.82] वह राम के दर्शन पायेगा,
[03:47.27] पता नहीं किस रूप में आकर,
[03:50.46] नारायण मिल जायेगा,
[03:53.38] निर्मल मन के दर्पण में,
[03:56.04] वह राम के दर्शन पायेगा।
[03:59.49] पता नहीं किस रूप में आकर,
[04:04.01] नारायण मिल जायेगा,
[04:05.61] निर्मल मन के दर्पण में,
[04:08.26] वह राम के दर्शन पायेगा।
[04:23.39] बन चुका बैरागी दिल,
[04:24.98] नाम तेरा ही लेता है,
[04:26.31] शायर अपनी सांसें ये,
[04:27.90] राम सिया को देता है,
[04:29.23] और नहीं इच्छा है अब,
[04:30.82] जीने की मेरी राम यहां,
[04:32.41] बाद मुझे मेरी मौत के,
[04:33.74] बस ले जाना तुम त्रेता में।
[04:35.87] बन चुका बैरागी दिल,
[04:36.93] नाम तेरा ही लेता है,
[04:38.27] शायर अपनी सांसें ये,
[04:39.89] राम सिया को देता है,
[04:41.48] और नहीं इच्छा है अब,
[04:43.07] जीने की मेरी राम यहां,
[04:44.40] बाद मुझे मेरी मौत के,
[04:45.74] बस ले जाना तुम त्रेता में।
[04:59.84] पता नहीं किस रूप में आकर।
