Shree ganpati atharvashirsha
[00:09.50] भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।
[00:20.13] स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः ।
[00:25.71] व्यशेम देवहितं यदायूः ।
[00:33.67] ॐ: ।
[00:36.59] स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः ।
[00:41.91] स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
[00:47.22] स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः ।
[00:52.81] स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥
[00:58.12] ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
[01:11.69] ॐ नमस्ते गणपतये।
[01:17.00] त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।।
[01:20.72] त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।
[01:23.91] त्वमेव केवलं धर्तासि।।
[01:27.37] त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।
[01:30.55] त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।।
[01:35.33] त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।
[01:40.12] ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।।
[01:44.09] अव त्वं मां।। अव वक्तारं।।
[01:48.61] अव श्रोतारं। अवदातारं।।
[01:53.66] अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।।
[02:00.56] अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।।
[02:06.94] अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।।
[02:13.31] अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।।
[02:19.95] सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।3।।
[02:26.33] त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय।
[02:29.79] त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।।
[02:33.51] त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि।
[02:38.55] त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
[02:42.00] त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।4।
[02:47.32] सर्व जगदिदं त्वत्तो जायते।
[02:52.37] सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
[02:57.15] सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।
[03:02.22] सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।
[03:07.00] त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।
[03:11.79] त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।5।।
[03:14.97] त्वं गुणयत्रयातीत: ।
[03:18.42] त्वं देहत्रयातीत: ।
[03:21.61] त्वं कालत्रयातीत:।
[03:24.80] त्वं मूलाधार स्थितोऽसि नित्यं।
[03:29.07] त्वं शक्ति त्रयात्मक:।।
[03:31.98] त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्।
[03:37.59] त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णु
[03:40.76] स्त्वं रुद्र स्त्वं इन्द्र
[03:43.95] स्त्वं अग्नि स्त्वं वायु
[03:47.46] स्त्वं सूर्य स्त्वं चंद्रमास्त्वं
[03:52.24] ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।।6।।
[03:57.81] गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।।
[04:05.25] अनुस्वार: परतर:।। अर्धेन्दुलसितं।।
[04:11.62] तारेण ऋद्धं।। एतत्तव मनुस्वरूपं।।
[04:18.57] गकार: पूर्व रूपं अकारो मध्यरूपं।
[04:25.20] अनुस्वारश्चान्त्य रूपं।। बिन्दुरूत्तर रूपं।।
[04:30.78] नाद: संधानं।। संहिता संधि: सैषा गणेश विद्या।।
[04:37.96] गणक ऋषि: निचृद्रायत्रीछंद:।। गणपति देवता।।
[04:45.66] ॐ गं गणपतये नम:।।7।।
[04:52.30] एकदंताय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नोदंती प्रचोद्यात।।
[05:04.28] एकदंत चतुर्हस्तं पारामंकुशधारिणम्।।
[05:10.37] रदं च वरदं च हस्तै र्विभ्राणं मूषक ध्वजम्।।
[05:17.02] रक्तं लम्बोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।।
[05:23.66] रक्त गंधाऽनुलिप्तागं रक्तपुष्पै सुपूजितम्।।8।।
[05:30.30] भक्तानुकंपिन देवं जगत्कारणम्च्युतम्।।
[05:36.94] आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृतै: पुरुषात्परम।।
[05:43.59] एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनांवर:।। 9।।
[05:51.55] नमो व्रातपतये नमो गणपतये।। नम: प्रथमपत्तये।।
[06:01.65] नमस्तेऽस्तु लंबोदारायैकदंताय विघ्ननाशिने शिव सुताय।
[06:11.48] श्री वरदमूर्तये नमोनम:।।10।।
