new_128_Shree Hanuman Ji Ki Aarti - Hariharan
[00:02.34] ॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥
[00:04.48] मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
[00:06.60] जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
[00:11.11] वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
[00:15.63] श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥
[00:23.07] ॥ आरती ॥
[00:38.21] आरती कीजै हनुमान लला की ।
[00:59.45] दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
[01:25.23] जाके बल से गिरवर काँपे ।
[01:31.07] रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
[01:36.65] अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
[01:41.96] संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
[01:47.27] आरती कीजै हनुमान लला की ॥
[02:07.74] दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
[02:13.32] लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
[02:18.62] लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
[02:23.41] जात पवनसुत बार न लाई ॥
[02:39.62] आरती कीजै हनुमान लला की ॥
[03:00.62] लंका जारि असुर संहारे ।
[03:01.95] सियाराम जी के काज सँवारे ॥
[03:03.00] लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
[03:05.40] लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
[03:13.38] आरती कीजै हनुमान लला की ॥
[03:13.65] पैठि पताल तोरि जमकारे ।
[03:16.30] अहिरावण की भुजा उखारे ॥
[03:21.61] बाईं भुजा असुर दल मारे ।
[03:26.93] दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
[03:31.71] आरती कीजै हनुमान लला की ॥
[03:52.43] सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
[03:58.30] जय जय जय हनुमान उचारें ॥
[04:03.62] कंचन थार कपूर लौ छाई ।
[04:08.39] आरती करत अंजना माई ॥
[04:13.71] आरती कीजै हनुमान लला की ॥
[04:15.85] जो हनुमानजी की आरती गावे ।
[04:19.04] बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
[00:00.00] लंक विध्वंस किये रघुराई ।
[00:00.00] तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
[00:00.00] आरती कीजै हनुमान लला की ।
[00:00.00] दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
[00:00.00] ॥ इति संपूर्णंम् ॥
