Shiv Rudrastkam
[00:03.33] ...श्री रुद्राष्टकम....
[00:10.22] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[00:18.98] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[00:27.04] Music...
[00:53.08] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[01:01.07] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[01:07.97] निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरींह।
[01:14.90] चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।
[01:21.31] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[01:27.96] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[01:35.14] Music......
[02:00.92] निराकारमोंकारमूलं तुरीयं।
[02:08.16] गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।।
[02:15.07] करालं महाकाल कालं कृपालं।
[02:21.79] गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।
[02:28.95] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[02:35.86] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[02:43.85] Music......
[03:08.56] तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं।
[03:15.52] मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।।
[03:23.25] स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा।
[03:28.56] लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा।।
[03:35.72] चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं।
[03:41.87] प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।।
[03:49.33] मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं।
[03:55.79] प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।
[04:02.44] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[04:09.34] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[04:16.25] Music......
[04:41.49] प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं।
[04:48.98] अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।।
[04:55.35] त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं।
[05:01.99] भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।
[05:09.44] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[05:16.36] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[05:22.74] Music......
[05:47.96] कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।
[05:55.15] सदा सज्जनान्ददाता पुरारी।।
[06:02.30] चिदानंदसंदोह मोहापहारी।
[06:08.45] प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।
[06:14.82] न यावद् उमानाथ पादारविन्दं।
[06:21.23] भजंतीह लोके परे वा नराणां।।
[06:28.93] न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं।
[06:35.30] प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।
[06:42.48] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[06:48.87] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[06:55.54] Music......
[07:20.53] न जानामि योगं जपं नैव पूजां।
[07:27.44] नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।।
[07:34.62] जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं।
[07:41.28] प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।
[07:47.90] नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
[07:55.03] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं
[08:01.70] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं
[08:08.35] विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
[08:16.56] श्लोक-रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
[08:28.28] ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।
