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Hanuman Chalisa

Unknown artist
[09:46.08]·
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[00:02.39] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

[00:14.11] बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

[00:25.01] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

[00:36.17] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

[00:51.05] ॥ चौपाई ॥

[00:56.36] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

[01:01.94] जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥

[01:07.26] रामदूत अतुलित बल धामा।

[01:12.59] अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

[01:23.50] महाबीर बिक्रम बजरंगी।

[01:28.55] कुमति निवार सुमति के संगी॥

[01:34.12] कंचन बरन बिराज सुबेसा।

[01:39.44] कानन कुंडल कुंचित केसा॥

[01:44.50] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

[01:50.06] कांधे मूंज जनेऊ साजै॥

[01:55.37] संकर सुवन केसरीनंदन।

[02:00.42] तेज प्रताप महा जग बन्दन॥

[02:11.04] विद्यावान गुनी अति चातुर।

[02:16.36] राम काज करिबे को आतुर॥

[02:21.67] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

[02:26.98] राम लखन सीता मन बसिया॥

[02:32.04] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

[02:37.34] बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

[02:42.92] भीम रूप धरि असुर संहारे।

[02:47.98] रामचंद्र के काज संवारे॥

[02:58.59] लाय सजीवन लखन जियाये।

[03:03.91] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

[03:09.22] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

[03:14.53] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

[03:19.58] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

[03:24.89] अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

[03:30.48] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

[03:35.54] नारद सारद सहित अहीसा॥

[03:45.90] जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

[03:51.22] कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥

[03:56.80] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

[04:02.11] राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

[04:07.42] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।

[04:12.73] लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

[04:18.05] जुग सहस्र जोजन पर भानू।

[04:23.36] लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

[04:33.99] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

[04:39.56] जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥

[04:44.61] दुर्गम काज जगत के जेते।

[04:49.93] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

[04:54.97] राम दुआरे तुम रखवारे।

[05:00.56] होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

[05:05.88] सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

[05:10.92] तुम रक्षक काहू को डर ना॥

[05:21.55] आपन तेज सम्हारो आपै।

[05:27.12] तीनों लोक हांक तें कांपै॥

[05:32.17] भूत पिसाच निकट नहिं आवै।

[05:37.23] महाबीर जब नाम सुनावै॥

[05:42.53] नासै रोग हरै सब पीरा।

[05:48.11] जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

[05:53.45] संकट तें हनुमान छुड़ावै।

[05:58.77] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

[06:09.39] सब पर राम तपस्वी राजा।

[06:14.70] तिन के काज सकल तुम साजा॥

[06:20.01] और मनोरथ जो कोई लावै।

[06:24.79] सोइ अमित जीवन फल पावै॥

[06:30.37] चारों जुग परताप तुम्हारा।

[06:35.69] है परसिद्ध जगत उजियारा॥

[06:41.28] साधु-संत के तुम रखवारे।

[06:46.33] असुर निकंदन राम दुलारे॥

[06:56.95] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

[07:02.27] अस बर दीन जानकी माता॥

[07:07.32] राम रसायन तुम्हरे पासा।

[07:12.09] सदा रहो रघुपति के दासा॥

[07:17.69] तुम्हरे भजन राम को पावै।

[07:23.00] जनम-जनम के दुख बिसरावै॥

[07:28.57] अन्तकाल रघुबर पुर जाई।

[07:33.89] जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥

[07:44.25] और देवता चित्त न धरई।

[07:49.57] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

[07:54.88] संकट कटै मिटै सब पीरा।

[08:00.18] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

[08:05.24] जै जै जै हनुमान गोसाईं।

[08:10.54] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

[08:15.86] जो सत बार पाठ कर कोई।

[08:21.19] छूटहि बंदि महा सुख होई॥

[08:31.53] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

[08:37.11] होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

[08:42.68] तुलसीदास सदा हरि चेरा।

[08:47.20] कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥

[09:00.49] ॥ दोहा ॥

[09:01.01] पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।

[09:17.22] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥