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tomp3.cc - शर हनमन चलस Hanuman Chalisa I GULSHAN KUMAR I HARIHARAN Full HD Video Shree Hanuman Chalisa_320kbps

Unknown artist
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[00:02.23] श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

[00:13.92] बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

[00:24.54] [बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।

[00:35.97] ]बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

[00:50.59] ॥चौपाई॥

[00:56.42] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

[01:01.47] जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

[01:06.51] राम दूत अतुलित बल धामा ।

[01:12.09] अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

[01:22.45] महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।

[01:28.04] कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥

[01:33.36] कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।

[01:38.93] कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४

[01:43.98] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।

[01:49.29] काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥

[01:54.89] सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।

[01:59.68] तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥

[02:11.37] बिद्यावान गुनी अति चातुर ।

[02:15.89] राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

[02:21.46] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

[02:26.51] राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

[02:31.83] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

[02:36.88] बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥

[02:42.73] भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

[02:47.52] रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥

[02:57.87] लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।

[03:03.45] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥

[03:08.78] रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।

[03:13.82] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

[03:18.87] सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।

[03:24.45] अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥

[03:29.77] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

[03:35.07] नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

[03:45.18] जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

[03:50.75] कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

[03:56.33] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

[04:01.64] राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

[04:06.95] तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।

[04:12.00] लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥

[04:17.57] जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

[04:22.90] लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥

[04:33.51] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

[04:38.83] जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥

[04:43.89] दुर्गम काज जगत के जेते ।

[04:48.94] सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

[04:54.51] राम दुआरे तुम रखवारे ।

[05:00.36] होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

[05:05.40] सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।

[05:10.18] तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥

[05:20.82] आपन तेज सह्मारो आपै ।

[05:26.40] तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥

[05:31.98] भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

[05:36.76] महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

[05:42.07] नासै रोग हरै सब पीरा ।

[05:47.65] जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥

[05:52.97] सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।

[05:58.28] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

[06:08.65] सब पर राम तपस्वी राजा ।

[06:14.50] तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

[06:19.28] और मनोरथ जो कोई लावै ।

[06:24.59] सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

[06:29.92] चारों जुग परताप तुह्मारा ।

[06:35.49] है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

[06:40.79] साधु सन्त के तुम रखवारे ।

[06:45.58] असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥

[06:56.47] अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।

[07:01.51] अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥

[07:06.82] राम रसायन तुह्मरे पासा ।

[07:11.87] सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

[07:17.19] तुह्मरे भजन राम को पावै ।

[07:22.77] जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

[07:28.08] अन्त काल रघुबर पुर जाई ।

[07:33.12] जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

[07:43.48] और देवता चित्त न धरई ।

[07:49.06] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥

[07:54.37] सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।

[07:59.15] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

[08:04.47] जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

[08:09.78] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥

[08:15.37] जो सत बार पाठ कर कोई ।

[08:20.68] छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥

[08:31.08] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

[08:36.39] होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

[08:41.17] तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

[08:46.48] कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

[08:52.33] ॥दोहा॥

[09:01.63] पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।

[09:17.03] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥