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Hanuman chalisa

GULSHAN KUMAR
[09:41.62]·
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[00:01.19] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

[00:12.88] बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

[00:24.30] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

[00:35.18] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

[00:56.20] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

[01:00.98] जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

[01:06.30] रामदूत अतुलित बल धामा।

[01:11.62] अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

[01:22.23] महाबीर बिक्रम बजरंगी।

[01:28.08] कुमति निवार सुमति के संगी।।

[01:33.38] कंचन बरन बिराज सुबेसा।

[01:38.70] कानन कुंडल कुंचित केसा।।

[01:43.75] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

[01:49.06] कांधे मूंज जनेऊ साजै।

[01:54.37] संकर सुवन केसरीनंदन।

[01:59.69] तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

[02:10.04] विद्यावान गुनी अति चातुर।

[02:17.48] राम काज करिबे को आतुर।।

[02:20.94] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

[02:25.99] राम लखन सीता मन बसिया।।

[02:31.56] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

[02:36.62] बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

[02:42.19] भीम रूप धरि असुर संहारे।

[02:47.51] रामचंद्र के काज संवारे।।

[02:57.60] लाय सजीवन लखन जियाये।

[03:03.17] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

[03:08.75] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

[03:13.53] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

[03:19.11] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

[03:24.68] अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

[03:29.47] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

[03:34.52] नारद सारद सहित अहीसा।।

[03:45.40] जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

[03:50.99] कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

[03:56.03] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

[04:01.34] राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

[04:06.65] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।

[04:11.70] लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

[04:15.16] जुग सहस्र जोजन पर भानू।

[04:22.62] लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

[04:33.24] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

[04:38.54] जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

[04:43.86] दुर्गम काज जगत के जेते।

[04:48.64] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

[04:54.49] राम दुआरे तुम रखवारे।

[04:59.53] होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

[05:04.84] सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

[05:10.15] तुम रक्षक काहू को डर ना।।

[05:20.80] आपन तेज सम्हारो आपै।

[05:26.37] तीनों लोक हांक तें कांपै।।

[05:31.42] भूत पिसाच निकट नहिं आवै।

[05:36.73] महाबीर जब नाम सुनावै।।

[05:42.32] नासै रोग हरै सब पीरा।

[05:47.35] जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

[05:52.67] संकट तें हनुमान छुड़ावै।

[05:57.72] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

[06:08.64] सब पर राम तपस्वी राजा।

[06:13.95] तिन के काज सकल तुम साजा।

[06:19.00] और मनोरथ जो कोई लावै।

[06:24.04] सोइ अमित जीवन फल पावै।।

[06:29.89] चारों जुग परताप तुम्हारा।

[06:35.20] है परसिद्ध जगत उजियारा।।

[06:40.52] साधु-संत के तुम रखवारे।

[06:45.57] असुर निकंदन राम दुलारे।।

[06:56.18] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

[07:02.57] अस बर दीन जानकी माता।।

[07:06.54] राम रसायन तुम्हरे पासा।

[07:11.86] सदा रहो रघुपति के दासा।।

[07:17.17] तुम्हरे भजन राम को पावै।

[07:22.49] जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

[07:27.80] अन्तकाल रघुबर पुर जाई।

[07:33.11] जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

[07:43.73] और देवता चित्त न धरई।

[07:48.78] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

[07:54.09] संकट कटै मिटै सब पीरा।

[07:58.88] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

[08:04.99] जै जै जै हनुमान गोसाईं।

[08:09.76] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

[08:15.08] जो सत बार पाठ कर कोई।

[08:20.13] छूटहि बंदि महा सुख होई।।

[08:31.01] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

[08:36.05] होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

[08:41.64] तुलसीदास सदा हरि चेरा।

[08:46.95] कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।