AARAMBH
[00:00.22] …
[00:44.41] आरम्भ है प्रचंड,
[00:46.01] बोले मस्तकों के झुंड,
[00:48.19] आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
[00:51.38] …
[00:59.61] आरम्भ है प्रचंड,
[01:01.52] बोले मस्तकों के झुंड,
[01:03.64] आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
[01:07.33] आन बान शान,
[01:09.22] याकि जान का हो दान,
[01:11.09] आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!
[01:14.78] आरम्भ है प्रचंड,
[01:16.90] बोले मस्तकों के झुंड,
[01:18.76] आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
[01:22.48] आन बान शान,
[01:24.44] याकि जान का हो दान,
[01:26.57] आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!
[01:30.24] आरम्भ है प्रचंड….
[01:34.25] …
[01:49.43] मन करे सो प्राण दे,
[01:51.61] जो मन करे सो प्राण ले,
[01:53.47] वही तो एक सर्वशक्तिमान है,
[01:57.12] मन करे सो प्राण दे,
[01:59.06] जो मन करे सो प्राण ले,
[02:01.18] वही तो एक सर्वशक्तिमान है,
[02:04.93] विश्व की पुकार है,
[02:06.80] ये भागवत का सार है,
[02:08.93] कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है,
[02:12.62] कौरवों की भीड़ हो,
[02:14.47] या पांडवों का नीड़ हो,
[02:16.65] जो लड़ सका है वो ही तो महान है!
[02:20.41] जीत की हवस नहीं,
[02:22.30] किसी पे कोई वश नहीं,
[02:24.18] क्या ज़िन्दगी है,
[02:25.58] ठोकरों पे मार दो,
[02:27.92] मौत अंत है नहीं,
[02:30.12] तो मौत से भी क्यों डरें,
[02:31.76] ये जाके आसमान में दहाड़ दो!
[02:35.38] आरम्भ है प्रचंड,
[02:37.59] बोले मस्तकों के झुंड,
[02:39.45] आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
[02:43.16] आन बान शान,
[02:45.05] याकि जान का हो दान,
[02:46.93] आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!
[02:50.64] आरंभ है प्रचंड….
[02:54.63] …
[03:10.38] हो दया का भाव,
[03:11.91] याकि शौर्य का चुनाव,
[03:14.04] याकि हार का वो घाव तुम ये सोच लो,
[03:17.87] हो दया का भाव,
[03:19.73] याकि शौर्य का चुनाव,
[03:21.58] याकि हार का वो घाव तुम ये सोच लो,
[03:25.36] याकि पूरे भाल पे जला रहे विजय का लाल,
[03:29.61] लाल यह गुलाल तुम ये सोच लो,
[03:33.62] रंग केसरी हो या,
[03:35.48] मृदंग केसरी हो,
[03:37.08] याकि केसरी हो ताल तुम ये सोच लो!
[03:42.89] …
[03:46.65] जिस कवि की कल्पना में ज़िन्दगी हो प्रेम गीत,
[03:50.96] उस कवि को आज तुम नकार दो,
[03:54.41] भीगती मसों में आज,
[03:56.27] फूलती रगों में आज,
[03:58.19] जो आग की लपट का तुम बघार दो!
[04:01.87] आरम्भ है प्रचंड,
[04:03.79] बोले मस्तकों के झुंड,
[04:05.69] आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
[04:09.67] आन बान शान,
[04:11.54] याकि जान का हो दान,
[04:13.39] आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!
[04:17.38] आरम्भ है प्रचंड…
[04:21.11] आरम्भ है प्रचंड…
[04:24.84] आरम्भ है प्रचंड…
[04:29.15] …
