new_320_Sankatmochan Hanuman Ashtak - Hariharan
[00:06.04] ॥ हनुमानाष्टक ॥
[00:07.91] बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
[00:11.62] तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
[00:15.34] ताहि सों त्रास भयो जग को,
[00:19.60] यह संकट काहु सों जात न टारो ।
[00:24.37] देवन आनि करी बिनती तब,
[00:28.11] छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
[00:33.15] को नहीं जानत है जग में कपि,
[00:39.81] संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥
[00:54.71] बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
[00:59.23] जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
[01:03.21] चौंकि महामुनि साप दियो तब,
[01:07.72] चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
[01:11.74] कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
[01:15.99] सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥
[01:36.72] अंगद के संग लेन गए सिय,
[01:45.52] खोज कपीस यह बैन उचारो ।
[01:49.54] जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
[01:50.07] बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
[01:54.06] हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,
[01:57.79] लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥
[02:24.39] रावण त्रास दई सिय को सब,
[02:28.37] राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
[02:32.35] ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
[02:36.62] जाए महा रजनीचर मारो ।
[02:40.87] चाहत सीय असोक सों आगि सु,
[02:45.13] दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥
[02:49.40] बान लग्यो उर लछिमन के तब,
[03:13.70] प्राण तजे सुत रावन मारो ।
[03:15.30] लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
[03:17.96] तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
[03:21.96] आनि सजीवन हाथ दई तब,
[03:26.22] लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥
[03:52.61] रावन युद्ध अजान कियो तब,
[03:59.78] नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
[04:01.38] श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
[04:05.62] मोह भयो यह संकट भारो I
[04:09.08] आनि खगेस तबै हनुमान जु,
[04:13.06] बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥
[04:33.55] बंधु समेत जबै अहिरावन,
[04:38.06] लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
[04:41.52] देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,
[04:46.03] देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
[04:49.49] जाय सहाय भयो तब ही,
[04:53.47] अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥
[05:15.29] काज किये बड़ देवन के तुम,
[05:18.73] बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
[05:22.48] कौन सो संकट मोर गरीब को,
[05:26.73] जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
[05:30.74] बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
[05:35.01] जो कछु संकट होय हमारो ॥ ८ ॥
[00:00.00] ॥ दोहा ॥
[00:00.00] लाल देह लाली लसे,
[00:00.00] अरु धरि लाल लंगूर ।
[00:00.00] वज्र देह दानव दलन,
[00:00.00] जय जय जय कपि सूर ॥
