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Apne apne tol kahat

Bipin Vekaria
[14:10.76]·Synced by Guest·
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[00:33.06] अपने अपने टोल कहत व्रजवासियां ॥

[00:46.13] शरद कुहू निश जान दीपमालिका जो आई ।। गोपन मन आनंद फिरत उनमद अधिकाई ॥ ऐं पन थापे दीजीयें घरघर मंगलचार | सातवरसको सांवरो खेलत नंददुवार ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[01:37.21] बैठ नंद उपनंद बोल वृषभान पठाये ॥ सुरपति पूजा जान तहां चल गोविंद आये ॥ वारवार हाहा करें कहो बावा यह बात ।। घरघर गोरस संचियें कोंन देवकी जात ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[02:19.18] कान्ह तुमारी कुशल जान एक मंत्र उपेहें । खटरस व्यंजन साज भोग सुरपतिकों देहें । नंद कह्यो चुचकारकें जा दामोदर सोय ॥ वरस द्योसको द्योसहे महामहोत्सव होय ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[02:57.55] तब हँस बोले लाल मंत्र बहोर्यो एक कीनों ॥ आदि पुरुष निज जान रेंन सपनों मोहि दीनों । सब देवनको देवता गिरि गोवर्द्धन राज ॥ ताहि भोग किन दीजियें सुरपतिको कहा काज ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[03:34.30] बाढे गोधन वृंद दूध दधिको कहा लेखो ॥ यह परचो विद्यमान नयन अपने किन देखो। तुम देखत बल खायगो मोंहों मांग्यो फल देय ॥ गोप कुशलजो चाहियें तो गिरि गोवर्द्धन सेय ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[04:31.79] गोपन कीयो विचार सबन मिल शकट जो साजे ॥ बहु विध कर पकवान चले जहां बाजन बाजे । एक वनही वनकों चले एक नंदीसुर भीर ॥ एकन पेंडो पावही फूले फिरत अहीर ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[05:18.10] एक ऊबटव्ह चले एक वनही वनछाये ॥ एक गावें गुण गोविंद प्रेम उमगे न समाये ॥ गोपनको सागर भयो गिरि भयो मंदराचार | रत्न भई सब गोपिका कान्ह विलोवन हार ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[06:16.16] व्रज चोरासी कोस परे गोपनके डेरा ॥ लंबे चौवन कोस जहाँ व्रजवास वसेरा । सबहिनके मन सांवरो देखियत सबन मंझार ॥ कौतुक भूले देवता आये लोक विसार ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[06:50.70] लीने विप्र बुलाय यज्ञ आरंभन कीनों ॥ सुरपति पूजा मेंट राज गोवर्द्धन दीनों ॥ देव दीवारी श्यामही सब मिल पूजन जाय ॥ नंद प्रतीत जो चाहिये तो तुम देखत लिखाय ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[07:38.90] प्रथमही दूध न्हवाय बोहोरि गंगाजल ढार्यो । बडो देवता जान कान्हको मतो बिचार्यो । जेसेहें गिरिराजजू तैसो अन्नको कोट ।। मग्नभये पूजा करें नरनारी बड छोट

[08:13.23] ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[08:19.08] सहस्त्र भुजाउरधरें करें भोजन अधिकाई ॥ नख शिखलों अनुहार मानों दूसरो कन्हाई ॥ ललिता राधासों कहे तेरे हृदें समाय ॥ गहे अंगुरिया नंदकी सो ढोटा पूजा खाय ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[09:08.30] पीत दुमालो बन्यो कंठ मोतिनकी माला ॥ सुंदर सुभग शरीर झलमले नयन विशाला । श्यामकी शोभा गिरि भयो गिरिकी शोभा श्याम ॥ जेसो परवत भातको ढिंग भैया बलराम ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[09:55.74] व्यंजन बहुत बनाय कहांलों नाम बखानों । भयो भातको कोट ओट गिरिराज छिपानों ॥ बरा बिराजे भातपे चंदा पटतर सोय ॥ यज्ञपुरुष भोजन करे सब देवन सुख होय ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[10:26.67] जेसी कंचनपुरी दिव्य रत्ननसों छाई ॥ बलि दीनी प्रात छांह चलि पूरव आई । बदरोला वृषभानकी रही विलोवन हार ।। ताकी बलि उन देवता लीनी भुजापसार ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[11:06.80] सब सामग्री अरपि गोप गोपिन करजोरे । अगणित कीने स्वाद दास बरणे कहा थोरे ॥ यह विध पूजा कीजिये कह्यो सबन समुझाय ॥ श्याम कह्यो सूरदाससों मेरी लीला सरस बनाय ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[11:45.39] अपने अपने टोल कहत व्रजवासियां ॥

[12:07.16] सब सामग्री अरपि गोप गोपिन करजोरे । अगणित कीने स्वाद दास बरणे कहा थोरे ॥ यह विध पूजा कीजिये कह्यो सबन समुझाय ॥ श्याम कह्यो सूरदाससों मेरी लीला सरस बनाय ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[12:52.40] अपने अपने टोल कहत व्रजवासियां ॥

[13:07.33] शरद कुहू निश जान दीपमालिका जो आई ।। गोपन मन आनंद फिरत उनमद अधिकाई ॥ ऐं पन थापे दीजीयें घरघर मंगलचार | सातवरसको सांवरो खेलत नंददुवार ॥ कहत व्रजवासियां ॥

[13:47.74] अपने अपने टोल कहत व्रजवासियां ॥