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Krishna Damodar Storam

Agam Aggrawal
[07:08.83]·Synced by Guest·
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[01:09.13] करारविन्देन पदार्विन्दं, मुखार्विन्दे विनिवेश यन्तम्। वटस्य पत्रस्य पुटेशयानं, बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि॥

[01:33.62] श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव। जिव्हे पिबस्वा मृतमेव देव, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[02:16.22] विक्रे तुकामा खिल गोपकन्या, मुरारि पादार्पित चित्त वृतिः। दध्यादिकं मोहावशाद वोचद्, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[02:41.06] गृहे-गृहे गोपवधू कदम्बा:, सर्वे मिलित्वा समवाप्य योगम्। पुण्यानि नामानि पठन्ति नित्यं, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[03:23.34] सुखं शयाना निलये निजेऽपि, नामानि विष्णोः प्रवदन्ति मर्त्याः। ते निश्चितं तन्मयतमां व्रजन्ति, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[03:53.97] जिह्‍वे दैवं भज सुन्दराणि, नामानि कृष्णस्य मनोहराणि। समस्त भक्तार्ति विनाशनानि, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[04:31.34] सुखावसाने इदमेव सारं, दुःखावसाने इदमेव ज्ञेयम्। देहावसाने इदमेव जाप्यं, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[04:55.31] जिह्‍वे रसज्ञे मधुरप्रिया त्वं, सत्यं हितं त्वां परमं वदामि। आवर्णये त्वं मधुराक्षराणि, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[05:37.10] त्वामेव याचे मन देहि जिह्‍वे, समागते दण्डधरे कृतान्ते। वक्तव्यमेवं मधुरम सुभक्तया, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[05:59.98] श्रीनाथ विश्वेश्वर विश्व मुर्ते श्री देवकीनन्दन दैत्य शत्रु । जिव्हे पिबस्वा मृतमेव देव, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

[06:00.83] श्री कृष्ण राधावर गोकुलेश, गोपाल गोवर्धन नाथ विष्णो। जिह्‍वे पिबस्वा मृतमेवदेवं, गोविन्द दामोदर माधवेति॥