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Bajrang baan logi

Rasraj Ji Maharaj
[03:38.04]·
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[00:05.04] ॥ दोहा ॥

[00:09.83] निश्चय प्रेम प्रतीति ते,बिनय करै सनमान।

[00:16.46] तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥

[00:29.49] ॥ चौपाई ॥

[00:32.93] जय हनुमन्त सन्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

[00:37.99] जन के काज विलम्ब न कीजै।आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

[00:39.59] जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा।सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥

[00:42.27] आगे जाय लंकिनी रोका।मारेहु लात गई सुर लोका॥

[00:46.28] जाय विभीषण को सुख दीन्हा।सीता निरखि परम पद लीन्हा॥

[00:50.59] बाग उजारि सिन्धु महं बोरा।अति आतुर यम कातर तोरा॥

[00:55.39] अक्षय कुमार मारि संहारा।लूम लपेटि लंक को जारा॥

[00:59.63] लाह समान लंक जरि गई।जय जय धुनि सुर पुर महं भई॥

[01:03.89] अब विलम्ब केहि कारण स्वामी।कृपा करहुं उर अन्तर्यामी॥

[01:08.40] जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता।आतुर होइ दु:ख करहुं निपाता॥

[01:12.67] जय गिरिधर जय जय सुख सागर।सुर समूह समरथ भटनागर॥

[01:17.23] ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।बैरिहिं मारू बज्र की कीले॥

[01:21.48] गदा बज्र लै बैरिहिं मारो।महाराज प्रभु दास उबारो॥

[01:25.73] ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो।बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥

[01:30.51] ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा।ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥

[01:34.23] सत्य होउ हरि शपथ पायके।रामदूत धरु मारु धाय के॥

[01:38.81] जय जय जय हनुमन्त अगाधा।दु:ख पावत जन केहि अपराधा॥

[01:43.35] पूजा जप तप नेम अचारा।नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

[01:47.62] वन उपवन मग गिरि गृह माहीं।तुमरे बल हम डरपत नाहीं॥

[01:52.13] पाय परौं कर जोरि मनावों।यह अवसर अब केहि गोहरावों॥

[01:56.12] जय अंजनि कुमार बलवन्ता।शंकर सुवन धीर हनुमन्ता॥

[02:00.95] बदन कराल काल कुल घालक।राम सहाय सदा प्रतिपालक॥

[02:04.94] भूत प्रेत पिशाच निशाचर।अग्नि बैताल काल मारीमर॥

[02:09.45] इन्हें मारु तोहि शपथ राम की।राखु नाथ मरजाद नाम की॥

[02:13.70] जनकसुता हरि दास कहावो।ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥

[02:17.97] जय जय जय धुनि होत अकाशा।सुमिरत होत दुसह दु:ख नाशा॥

[02:22.80] चरण शरण करि जोरि मनावों।यहि अवसर अब केहि गोहरावों॥

[02:26.78] उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई।पांय परौं कर जोरि मनाई॥

[02:31.29] ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता।ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥

[02:35.54] ॐ हं हं हांक देत कपि चञ्चल।ॐ सं सं सहम पराने खल दल॥

[02:39.79] अपने जन को तुरत उबारो।सुमिरत होय आनन्द हमारो॥

[02:44.34] यहि बजरंग बाण जेहि मारो।ताहि कहो फिर कौन उबारो॥

[02:48.59] पाठ करै बजरंग बाण की।हनुमत रक्षा करै प्राण की॥

[02:52.85] यह बजरंग बाण जो जापै।तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे॥

[02:57.44] धूप देय अरु जपै हमेशा।ताके तन नहिं रहे कलेशा॥

[03:18.47] ॥ दोहा ॥

[03:29.64] प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै,सदा धरै उर ध्यान।

[03:33.09] तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥