Bajrang baan lofi
[00:03.12] ॥ दोहा ॥
[00:05.04] निश्चय प्रेम प्रतीति ते,बिनय करै सनमान।
[00:17.00] तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥
[00:28.41] ॥ चौपाई ॥
[00:29.74] जय हनुमन्त सन्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
[00:33.24] जन के काज विलम्ब न कीजै।आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
[00:37.49] जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा।सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
[00:42.38] आगे जाय लंकिनी रोका।मारेहु लात गई सुर लोका॥
[00:43.98] जाय विभीषण को सुख दीन्हा।सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
[00:51.15] बाग उजारि सिन्धु महं बोरा।अति आतुर यम कातर तोरा॥
[00:55.14] अक्षय कुमार मारि संहारा।लूम लपेटि लंक को जारा॥
[00:59.65] लाह समान लंक जरि गई।जय जय धुनि सुर पुर महं भई॥
[01:03.90] अब विलम्ब केहि कारण स्वामी।कृपा करहुं उर अन्तर्यामी॥
[01:08.17] जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता।आतुर होइ दु:ख करहुं निपाता॥
[01:12.50] जय गिरिधर जय जय सुख सागर।सुर समूह समरथ भटनागर॥
[01:17.03] ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।बैरिहिं मारू बज्र की कीले॥
[01:21.54] गदा बज्र लै बैरिहिं मारो।महाराज प्रभु दास उबारो॥
[01:25.82] ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो।बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥
[01:29.80] ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा।ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥
[01:34.34] सत्य होउ हरि शपथ पायके।रामदूत धरु मारु धाय के॥
[01:38.87] जय जय जय हनुमन्त अगाधा।दु:ख पावत जन केहि अपराधा॥
[01:43.65] पूजा जप तप नेम अचारा।नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
[01:47.37] वन उपवन मग गिरि गृह माहीं।तुमरे बल हम डरपत नाहीं॥
[01:51.94] पाय परौं कर जोरि मनावों।यह अवसर अब केहि गोहरावों॥
[01:56.23] जय अंजनि कुमार बलवन्ता।शंकर सुवन धीर हनुमन्ता॥
[02:00.49] बदन कराल काल कुल घालक।राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
[02:05.01] भूत प्रेत पिशाच निशाचर।अग्नि बैताल काल मारीमर॥
[02:09.54] इन्हें मारु तोहि शपथ राम की।राखु नाथ मरजाद नाम की॥
[02:13.79] जनकसुता हरि दास कहावो।ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥
[02:18.04] जय जय जय धुनि होत अकाशा।सुमिरत होत दुसह दु:ख नाशा॥
[02:22.29] चरण शरण करि जोरि मनावों।यहि अवसर अब केहि गोहरावों॥
[02:27.36] उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई।पांय परौं कर जोरि मनाई॥
[02:31.10] ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता।ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
[02:35.37] ॐ हं हं हांक देत कपि चञ्चल।ॐ सं सं सहम पराने खल दल॥
[02:39.90] अपने जन को तुरत उबारो।सुमिरत होय आनन्द हमारो॥
[02:44.15] यहि बजरंग बाण जेहि मारो।ताहि कहो फिर कौन उबारो॥
[02:48.69] पाठ करै बजरंग बाण की।हनुमत रक्षा करै प्राण की॥
[02:53.22] यह बजरंग बाण जो जापै।तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे॥
[02:57.48] धूप देय अरु जपै हमेशा।ताके तन नहिं रहे कलेशा॥
[03:02.81] ॥ दोहा ॥
[03:28.58] प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै,सदा धरै उर ध्यान।
[03:33.37] तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥
