Hanuman Chalisa
[00:00.90] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि !
[00:13.12] बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि !!
[00:25.07] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार !
[00:36.21] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार !!
[01:17.39] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर..
[01:24.30] जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
[01:31.19] रामदूत अतुलित बल धामा।
[01:37.58] अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥1॥
[01:44.22] महाबीर बिक्रम बजरंगी।
[01:50.87] कुमति निवार सुमति के संगी ॥2॥
[01:57.53] कंचन बरन बिराज सुबेसा।
[02:04.15] कानन कुंडल कुंचित केसा ॥3॥
[02:11.06] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
[02:17.43] कांधे मूंज जनेऊ साजै॥4॥
[02:24.34] संकर सुवन केसरीनंदन।
[02:30.99] तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥5॥
[03:03.65] विद्यावान गुनी अति चातुर।
[03:10.82] राम काज करिबे को आतुर ॥6॥
[03:17.45] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
[03:24.11] राम लखन सीता मन बसिया ॥7॥
[03:30.75] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
[03:37.11] बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥8॥
[03:44.02] भीम रूप धरि असुर संहारे।
[03:50.67] रामचंद्र के काज संवारे ॥9॥
[03:57.31] लाय सजीवन लखन जियाये।
[04:03.93] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥10॥
[04:10.58] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
[04:17.23] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥11॥
[04:30.49] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
[04:36.89] अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥12॥
[04:43.79] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
[04:50.16] नारद सारद सहित अहीसा ॥13॥
[04:57.06] जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
[05:03.72] कबि कोबिद कहि सके कहां ते ॥14॥
[05:10.35] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
[05:16.99] राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥15॥
[05:23.89] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
[05:29.75] लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥16॥
[05:36.91] जुग सहस्र जोजन पर भानू।
[05:43.55] लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥17॥
[06:16.89] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
[06:23.27] जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥18॥
[06:29.91] दुर्गम काज जगत के जेते।
[06:36.55] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥19॥
[06:43.44] राम दुआरे तुम रखवारे।
[06:49.57] होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥20॥
[06:56.47] सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
[07:03.11] तुम रक्षक काहू को डर ना ॥21॥
[07:10.01] आपन तेज सम्हारो आपै।
[07:16.67] तीनों लोक हांक तें कांपै ॥22॥
[07:23.30] भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
[07:29.94] महाबीर जब नाम सुनावै ॥23॥
[07:43.23] नासै रोग हरै सब पीरा।
[07:49.59] जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥24॥
[07:56.50] संकट तें हनुमान छुड़ावै।
[08:03.13] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥25॥
[08:09.79] सब पर राम तपस्वी राजा।
[08:16.43] तिन के काज सकल तुम साजा ॥26॥
[08:23.06] और मनोरथ जो कोई लावै।
[08:29.69] सोइ अमित जीवन फल पावै ॥27॥
[08:36.35] चारों जुग परताप तुम्हारा।
[08:42.98] है परसिद्ध जगत उजियारा ॥28॥
[08:49.62] साधु-संत के तुम रखवारे।
[08:56.25] असुर निकंदन राम दुलारे ॥29॥
[09:29.48] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
[09:36.37] अस बर दीन जानकी माता ॥30॥
[09:42.74] राम रसायन तुम्हरे पासा।
[09:49.37] सदा रहो रघुपति के दासा ॥31॥
[09:56.04] तुम्हरे भजन राम को पावै।
[10:02.41] जनम-जनम के दुख बिसरावै ॥32॥
[10:09.32] अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
[10:16.23] जहां जन्म हरि-भक्त कहाई ॥33॥
[10:22.61] और देवता चित्त न धरई।
[10:29.52] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥34॥
[10:35.88] संकट कटै मिटै सब पीरा।
[10:42.51] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥35॥
[10:55.80] जै जै जै हनुमान गोसाईं।
[11:02.44] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥36॥
[11:09.35] जो सत बार पाठ कर कोई।
[11:15.74] छूटहि बंदि महा सुख होई ॥37॥
[11:22.36] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
[11:29.00] होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥38॥
[11:35.63] तुलसीदास सदा हरि चेरा।
[11:42.30] कीजै नाथ हृदय मंह डेरा ॥39॥
[11:51.58] श्री राम जय राम जय जय राम
[11:58.22] श्री राम जय राम जय जय राम
[12:04.35] पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
[12:13.63] राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥
