Bajrang Baan
[00:03.46] निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान ।
[00:16.21] तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान ॥
[00:29.24] जय हनुमन्त संत हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
[00:33.48] जन के काज बिलम्ब न कीजै । आतुर दौरि महासुख दीजै ।।
[00:38.00] जैसे कूदी सिन्धु महि पारा । सुरसा बदन पैठी विस्तारा ।।
[00:42.25] आगे जाय लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुर लोका ।।
[00:46.50] जाय विभीषण को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम-पद लीना ।।
[00:51.02] बाग उजारि सिन्धु मह बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ।।
[00:55.28] अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेटि लंक को जारा ।।
[00:59.79] लाह समान लंक जरि गई । जय-जय धुनि सुरपुर में भई ।।
[01:04.06] अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी । कृपा करहु उर अन्तर्यामी ।।
[01:08.31] जय जय लखन प्रान के दाता । आतुर होई दु:ख करहु निपाता ।।
[01:12.83] जै गिरिधर जै जै सुख सागर । सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
[01:17.34] ओम हनु हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
[01:21.60] गदा बज्र लै बैरिहि मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ।।
[01:25.86] ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ । बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ ।।
[01:30.10] ओम ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा । ओम हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा॥
[01:34.62] सत्य होहु हरी शपथ पायके । राम दूत धरु मारू जायके
[01:39.14] जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
[01:43.38] पूजा जप-तप नेम अचारा । नहिं जानत हो दास तुम्हारा ।।
[01:47.64] वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।
[01:51.92] पायं परौं कर जोरी मनावौं । येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
[01:56.44] जय अंजनी कुमार बलवंता । शंकर सुवन वीर हनुमंता ।।
[02:00.68] बदन कराल काल कुलघालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक ।।
[02:05.20] भूत प्रेत पिसाच निसाचर। अगिन वैताल काल मारी मर ।।
[02:09.46] इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद नाम की ।।
[02:13.98] जनकसुता हरि दास कहावो । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।
[02:18.23] जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ।।
[02:22.49] चरण शरण कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
[02:26.99] उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई । पायँ परौं, कर जोरि मनाई ।।
[02:31.24] ओम चं चं चं चं चपल चलंता । ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।
[02:35.76] ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल । ओम सं सं सहमि पराने खल-दल ।।
[02:40.01] अपने जन को तुरत उबारौ । सुमिरत होय आनंद हमारौ ।।
[02:44.26] यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कोन उबारै ।।
[02:48.78] पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्रान की ।।
[02:53.29] यह बजरंग बाण जो जापैं । ताते भूत-प्रेत सब कापैं ।।
[02:57.54] धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेसा ।।
