Shree Ram Chandra Kripalu
[00:04.06] ♪
[00:31.96] श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
[00:39.94] नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
[01:27.50] कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
[01:35.74] पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
[02:15.31] भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
[02:23.02] रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
[03:10.57] सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
[03:18.27] आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
[03:58.39] इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
[04:05.83] मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
[04:37.80] मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
[00:00.00] करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
[00:00.00] एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
[00:00.00] तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
[00:00.00] जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
[00:00.00] मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
[00:00.00] श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
[00:00.00] नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
