ShriHariStotram
[00:01.19] ॥ श्री हरि स्तोत्रम् ॥
[00:04.64] जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालंशरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं
[00:24.56] नभोनीलकायं दुरावारमायंसुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं॥1॥
[00:37.58] सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासंजगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
[00:48.20] गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रंहसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं॥2॥
[01:01.49] रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारंजलान्तर्विहारं धराभारहारं
[01:12.11] चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपंध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं॥3॥
[01:25.39] जराजन्महीनं परानन्दपीनंसमाधानलीनं सदैवानवीनं
[01:35.75] जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुंत्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं॥4॥
[01:49.30] कृताम्नायगानं खगाधीशयानंविमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
[01:59.66] स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलंनिरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं॥5॥
[02:12.93] समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशंजगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
[02:23.29] सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहंसुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं॥6॥
[02:36.84] सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठंगुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
[02:47.20] सदा युद्धधीरं महावीरवीरंमहाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं॥7॥
[03:00.48] रमावामभागं तलानग्रनागंकृताधीनयागं गतारागरागं
[03:10.84] मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतंगुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं॥8॥
[00:00.00] ॥ फलश्रुति ॥
[00:00.00] इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तंपठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
[00:00.00] स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकंजराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो॥9॥
