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shri Ram stuti

Unknown artist
[03:18.98]·Synced by Guest·
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[00:06.66] श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं ।।

[00:14.01] नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर-कंज पद कंजारुणं ।।१।।

[00:21.67] कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम ।।

[00:29.33] पट पीत मानहु तड़ित रूचि-शुची, नौमी जनक सुतावरं ॥२॥

[00:37.08] भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं ।।

[00:44.82] रघुनंद आनंद कंद कोशल चन्द्र दशरथ नंदनम ॥३॥

[00:52.11] सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभुषणं ।।

[00:59.82] आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित खरदूषणं ॥४॥

[01:38.08] इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं ।।

[01:45.50] मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल गंजनं ॥५॥

[01:53.21] मनु जाहि राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरो ।।

[02:01.07] करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥६॥

[02:08.69] एही भांति गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषीं अली ।।

[02:16.40] तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥७॥

[03:02.52] जानी गौरी अनुकूल, सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।।

[03:05.70] मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥८॥