Shri Hanuman Chalisa
[00:00.10] श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
[00:12.82] बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
[00:23.71] बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
[00:35.18] [00:0.00बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥
[00:59.09] ॥चौपाई॥
[00:59.89] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
[01:03.87] जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
[01:07.09] राम दूत अतुलित बल धामा ।
[01:11.60] अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥
[01:22.49] महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
[01:28.07] कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥
[01:33.12] कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
[01:38.43] कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥
[01:43.21] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
[01:49.32] काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥
[01:56.23] सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
[02:00.50] तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥
[02:10.32] बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
[02:15.90] राम काज करिबे को आतुर ॥७॥
[02:21.21] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
[02:26.26] राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥
[02:31.05] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
[02:36.62] बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥
[02:41.93] भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
[02:47.25] रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥
[02:57.88] लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
[03:04.24] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥
[03:08.76] रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
[03:13.81] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥
[03:18.86] सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
[03:24.18] अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥
[03:29.48] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
[03:34.81] नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥
[03:45.70] जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
[03:50.23] कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥
[03:55.54] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
[04:01.13] राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥
[04:06.70] तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
[04:12.28] लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥
[04:17.85] जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
[04:22.37] लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥
[04:33.26] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
[04:38.58] जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥
[04:43.63] दुर्गम काज जगत के जेते ।
[04:48.95] सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥
[04:54.27] राम दुआरे तुम रखवारे ।
[04:59.31] होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥
[05:05.15] सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
[05:10.46] तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥
[05:21.62] आपन तेज सह्मारो आपै ।
[05:26.13] तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥
[05:31.74] भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
[05:36.79] महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥
[05:42.11] नासै रोग हरै सब पीरा ।
[05:47.15] जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥
[05:52.99] सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
[05:58.31] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥
[06:08.94] सब पर राम तपस्वी राजा ।
[06:14.51] तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥
[06:19.56] और मनोरथ जो कोई लावै ।
[06:24.34] सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥
[06:29.92] चारों जुग परताप तुह्मारा ।
[06:35.23] है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥
[06:40.54] साधु सन्त के तुम रखवारे ।
[06:45.59] असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥
[06:56.22] अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
[07:01.26] अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥
[07:06.84] राम रसायन तुह्मरे पासा ।
[07:12.15] सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥
[07:17.73] तुह्मरे भजन राम को पावै ।
[07:23.04] जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥
[07:28.09] अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
[07:33.40] जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥
[07:43.51] और देवता चित्त न धरई ।
[07:49.09] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥
[07:54.40] सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
[07:59.45] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥
[08:04.50] जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
[08:09.81] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥
[08:15.40] जो सत बार पाठ कर कोई ।
[08:20.71] छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥
[08:30.55] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
[08:36.14] होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥
[08:41.19] तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
[08:46.76] कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥
[08:51.80] ॥दोहा॥
[09:00.31] पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
[09:15.98] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥
