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Shekhar Ravjianis Hanuman Chalisa

Shekhar Ravjiani
[09:01.71]·Synced by Guest·
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[00:02.18] श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

[00:19.22] बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

[00:36.23] बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।

[00:52.73] बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

[01:07.62] ॥चौपाई॥

[01:12.11] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

[01:15.05] जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

[01:20.10] राम दूत अतुलित बल धामा ।

[01:23.83] अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

[01:30.74] महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।

[01:33.96] कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥

[01:39.27] कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।

[01:42.72] कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

[01:49.37] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।

[01:52.81] काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥

[01:58.13] सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।

[02:01.60] तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥

[02:08.50] बिद्यावान गुनी अति चातुर ।

[02:11.69] राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

[02:16.51] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

[02:20.50] राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

[02:26.87] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

[02:30.60] बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥

[02:35.71] भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

[02:39.20] रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥

[02:44.52] लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।

[02:47.98] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥

[02:54.62] रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।

[02:58.07] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

[03:03.38] सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।

[03:06.84] अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥

[03:11.89] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

[03:15.34] नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

[03:20.39] जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

[03:23.84] कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

[03:29.15] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

[03:32.34] राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

[03:37.65] तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।

[03:40.84] लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥

[03:49.62] जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

[03:52.81] लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥

[03:58.12] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

[04:01.57] जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥

[04:09.82] दुर्गम काज जगत के जेते ।

[04:13.27] सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

[04:18.85] राम दुआरे तुम रखवारे ।

[04:22.05] होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

[04:30.80] सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।

[04:34.07] तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥

[04:39.14] आपन तेज सह्मारो आपै ।

[04:42.60] तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥

[04:49.24] भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

[04:53.22] महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

[04:56.49] नासै रोग हरै सब पीरा ।

[04:59.95] जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥

[05:06.59] सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।

[05:10.05] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

[05:15.09] सब पर राम तपस्वी राजा ।

[05:18.81] तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

[05:25.47] और मनोरथ जो कोई लावै ।

[05:28.91] सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

[05:34.24] चारों जुग परताप तुह्मारा ।

[05:37.68] है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

[05:44.06] साधु सन्त के तुम रखवारे ।

[05:47.77] असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥

[05:53.09] अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।

[05:56.54] अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥

[06:03.18] राम रसायन तुह्मरे पासा ।

[06:06.37] सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

[06:11.95] तुह्मरे भजन राम को पावै ।

[06:15.40] जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

[06:22.33] अन्त काल रघुबर पुर जाई ।

[06:25.52] जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

[06:30.82] और देवता चित्त न धरई ।

[06:34.01] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥

[06:40.91] सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।

[06:44.14] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

[06:47.86] जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

[06:51.05] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥

[06:54.50] जो सत बार पाठ कर कोई ।

[06:58.22] छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥

[07:02.77] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

[07:06.52] होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

[07:11.84] तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

[07:15.29] कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

[07:25.65] ॥दोहा॥

[07:38.46] पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।

[07:52.53] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥