SANGHARSH
[00:01.21] ♪♪
[00:06.28] ♪♪
[00:15.35] मैं कुंती पुत्र कर्ण
[00:16.94] आज दास्तान अपनी गाता हूं।
[00:18.27] मैंने क्या क्या देखा जीवन मैं
[00:19.87] आज तुम सबको दिखलाता हुं।।
[00:21.73] दुर्वासा ऋषि की माया से
[00:23.32] मां कुंती को वरदान मिला।
[00:24.91] माता का वरदान भी मुझपे
[00:26.78] श्राप बनके हावी हुआ।।
[00:28.10] बाल्यकाल में कुंती मां ने
[00:29.96] क्यू मुझको यूं त्याग दिया।
[00:31.30] अबोध से उस बालक ने
[00:33.16] ना जाने क्या अपराध किया।।
[00:34.75] मेरी माता भी मजबूर थी
[00:36.35] कर्तव्य का निर्वाह किया।
[00:38.21] लाड़–प्यार मिलना था मुझे
[00:39.54] मां गंगा का प्रवाह मिला।।
[00:41.43] समय ने रुख यूं बदल लिया
[00:43.02] था मां कुंती की गोद में।
[00:44.35] निद्रा से आंखे खोला तो
[00:46.21] पाया गंगा के शोर में।।
[00:48.07] उस ठोकर खाते बालक को
[00:49.72] जब राधा मां ने ढूंढ लिया।
[00:51.03] मैं कुंती पुत्र कौंतये अब
[00:53.16] राधेय भी कहलाने लगा।।
[00:54.75] अब जैसे जैसे बड़ा हुआ
[00:56.11] मुझे धनुर्धारी बनना था पर।
[00:57.70] सूत पुत्र राधेय को
[00:59.56] विद्या पाना भी मुश्किल था।।
[01:01.16] अब धनुर्विद्या पाने हेतु
[01:02.75] गुरु द्रोण के पास गया।
[01:04.34] वो राजवंश को देते शिक्षा
[01:06.20] सूत को इनकार दिया।।
[01:07.80] उदासीनता चेहरे पर
[01:09.39] मुस्कान को मैं तरस गया।
[01:10.98] मैं दानवीर मैं सूर्यपुत्र
[01:12.84] जैसे जीते जी मर गया।।
[01:14.44] पिता श्री का कवच मिला पर
[01:15.77] मां का आंचल छूट गया।
[01:17.62] जो कुछ पाया जीवन में
[01:19.22] धीरे धीरे सब छूट चला।।
[01:20.87] अब क्या करता मैं हारा था
[01:22.46] मेरे सारे रास्ते बंद थे।
[01:24.06] मैं हर तरफ से मारा था
[01:25.65] टूटे सारे संबंध थे।।
[01:27.51] पहले कुंती मां ने त्याग दिया।
[01:28.85] फिर राधा मां से दूर गया।
[01:30.72] भगवान से पाई विद्या को भी
[01:32.57] अंत समय में भूल गया।।
[01:34.17] कवच कुंडल भी छूट गए
[01:35.76] मेरी पत्नी से भी दूर गया।।
[01:37.09] क्या ही किस्मत मानोगे तुम
[01:38.95] जब विद्या को ही भूल गया।।
[01:40.54] छल से पाई विद्या थी
[01:42.13] किया कोई ना पाप था।
[01:43.73] है परशुराम भगवान आपने
[01:45.63] दे दिया क्यूं श्राप था।।
[01:47.22] अगर ना दिया होता वो श्राप
[01:48.81] ना इतना कुछ मैं भोगता।
[01:50.41] उस कुरुक्षेत्र भूमि का मंजर
[01:52.26] अलग दिशा में मोड़ता।।
[01:53.86] प्रचंड बाणों के वेग से
[01:55.19] प्रलय रक्त की ला देता।
[01:57.05] प्रतंच्या खीचके धनुष की
[01:58.64] मैं त्राहि त्राहि मचा देता।।
[02:00.23] वो तो(स्वयं) वासुदेव थे सारथी
[02:01.83] ध्वजा विराजे हनुमान थे।
[02:03.42] हिला देता था रथ को भी
[02:05.01] मेरे बाणों के प्रहार से।।
[02:06.61] मैं सूर्यदेव का अंश था
[02:08.47] भीषण गर्मी मेरे बाण में।
[02:10.06] ना धंसता पहिया धरती में
[02:11.39] कर देता सबको राख मैं।।
[02:13.51] पर क्या करता मैं यारो मैं तो
[02:15.37] अपनो से ही हारा था।
[02:16.70] संघर्ष में ना साथ मिला
[02:18.56] ना किसी का सहारा था।।
[02:19.89] सूर्यदेव का पुत्र था पर
[02:21.75] अंधकार में जीवन बीता था।
[02:23.34] दुनिया को देते रोशनी
[02:25.20] क्यूं मेरे मैं अंधेरा था।।
[02:26.53] दुर्योधन ने था दिया साथ
[02:28.39] मतलब से राज्य अंग दिया।
[02:29.98] मित्रता का देके झांसा
[02:31.58] विद्या गिरवी रख लिया।।
[02:33.44] खैर किसी का कोई दोष नहीं
[02:34.76] सब अपनी जगह ठीक थे।
[02:36.36] मां कुंती का ना दोष था
[02:38.49] परशुराम भी सटीक थे।।
[02:39.59] ना गुरु द्रोण की गलती थी
[02:41.45] ना कान्हा से नाराज था।
[02:43.31] मेरी मौत का असली जिम्मेदार
[02:44.91] जाती में बंटा समाज था।।
[02:46.24] वर्णों में बटे समाज को क्यों
[02:48.36] जात–पात में बांट दिया।
[02:50.22] इस कुंती पुत्र राधेय को
[02:51.29] तुमने ही जिंदा मार दिया।।
[02:52.87] ज्येष्ठ पुत्र मां कुंती का मैं
[02:54.73] अनुज के हाथो मारा गया।
[02:56.33] किस्मत से मारा बदकिस्मत
[02:57.66] अधर्म तरफ हार गया।।
[02:59.57] कवच को भी छोड़ दिया
[03:01.43] कुंडल भी मैंने दान किए।
[03:02.76] वासुदेव के कहने पर मैंने
[03:04.62] प्राण भी अपने त्याग दिए।।
[03:06.21] समाज ने ठुकराया था मुझे
[03:07.54] मेरे ज्ञान का ना मोल मिला।
[03:09.66] गांडीव के प्रहार से
[03:10.99] संसारी दुनिया छोड़ चला।।
[03:13.12] ♪♪
