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नज़र आती नहीं मंज़िल

मोहम्मद रफ़ी
[04:11.09]·Synced by Guest·
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[00:20.37] नज़र आती नहीं मंज़िल, तड़पने से भी क्या हासिल

[00:32.37] तक़दीर में, ऐ मेरे दिल, अंधेरे ही, अंधेरे हैं

[00:44.11] नज़र आती नहीं मंज़िल

[01:09.98] मजबूरी ने, जिसको मारा, उसका कौन सहारा

[01:21.61] मांझी तो मिल, जाते हैं लेकिन, मिलता नहीं किनारा

[01:31.12] तक़दीर में, ऐ मेरे दिल, अंधेरे ही, अंधेरे हैं

[01:42.67] नज़र आती नहीं मंज़िल

[02:08.55] नैनों से यूँ, छिन गई ज्योती, सीप से जैसे मोती

[02:19.92] एक जान और, सौ दुश्मन हैं, काश ये जान न होती

[02:29.03] तक़दीर में, ऐ मेरे दिल, अंधेरे ही, अंधेरे हैं

[02:40.82] नज़र आती नहीं मंज़िल

[03:06.00] खलती है ये, पास की दूरी, जलती आस अधूरी

[03:17.74] किसको कोई, दोष लगाए, सब के संग मजबूरी

[03:26.65] तक़दीर में, ऐ मेरे दिल, अंधेरे ही, अंधेरे हैं

[03:38.72] नज़र आती नहीं मंज़िल, तड़पने से, भी क्या हासिल

[03:49.98] तक़दीर में, ऐ मेरे दिल, अंधेरे ही, अंधेरे हैं

[04:01.54] नज़र आती नहीं मंज़िल