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श्री हनुमान चालीसा 🌺🙏 Shree Hanuman Chalisa Original Video 🙏🌺 GULSHAN KUMAR HARIHARAN Full HD - T-Series Bhakti Sagar

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[00:01.80] श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

[00:13.68] बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

[00:24.04] बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।

[00:35.19] बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

[00:49.54] ॥चौपाई॥

[00:55.65] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

[01:00.98] जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

[01:06.29] राम दूत अतुलित बल धामा ।

[01:11.60] अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

[01:22.76] महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।

[01:27.81] कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥

[01:33.12] कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।

[01:38.43] कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

[01:43.74] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।

[01:49.05] काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥

[01:54.37] सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।

[01:59.41] तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥

[02:10.30] बिद्यावान गुनी अति चातुर ।

[02:15.36] राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

[02:20.67] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

[02:26.51] राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

[02:31.29] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

[02:36.60] बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥

[02:42.44] भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

[02:47.23] रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥

[02:57.85] लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।

[03:03.16] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥

[03:08.21] रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।

[03:13.79] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

[03:18.57] सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।

[03:24.12] अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥

[03:29.43] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

[03:34.74] नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

[03:45.37] जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

[03:50.68] कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

[03:55.99] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

[04:01.30] राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

[04:06.89] तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।

[04:11.66] लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥

[04:17.51] जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

[04:22.29] लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥

[04:33.18] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

[04:38.50] जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥

[04:43.54] दुर्गम काज जगत के जेते ।

[04:49.12] सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

[04:54.17] राम दुआरे तुम रखवारे ।

[04:59.48] होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

[05:05.05] सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।

[05:10.11] तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥

[05:20.99] आपन तेज सह्मारो आपै ।

[05:26.04] तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥

[05:31.35] भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

[05:36.40] महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

[05:41.99] नासै रोग हरै सब पीरा ।

[05:47.04] जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥

[05:52.62] सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।

[05:57.66] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

[06:08.55] सब पर राम तपस्वी राजा ।

[06:14.13] तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

[06:18.92] और मनोरथ जो कोई लावै ।

[06:24.24] सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

[06:29.80] चारों जुग परताप तुह्मारा ।

[06:34.86] है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

[06:40.18] साधु सन्त के तुम रखवारे ।

[06:45.76] असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥

[06:56.12] अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।

[07:01.43] अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥

[07:06.50] राम रसायन तुह्मरे पासा ।

[07:11.54] सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

[07:17.12] तुह्मरे भजन राम को पावै ।

[07:22.16] जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

[07:27.74] अन्त काल रघुबर पुर जाई ।

[07:32.79] जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

[07:43.41] और देवता चित्त न धरई ।

[07:48.99] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥

[07:54.04] सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।

[07:59.22] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

[08:04.26] जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

[08:09.58] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥

[08:14.89] जो सत बार पाठ कर कोई ।

[08:20.20] छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥

[08:30.56] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

[08:35.87] होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

[08:41.18] तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

[08:46.52] कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

[08:58.37] ॥दोहा॥

[08:59.70] पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।

[09:15.91] राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥