Gayatri Chalisa
[00:03.65] ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचंड ॥
[00:15.15] शांति कांति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखंड ॥1॥
[00:27.90] जगत जननी मंगल करनि गायत्री सुखधाम ।
[00:37.40] प्रणवों सावित्री स्वधा स्वाहा पूरन काम ॥ २॥
[01:07.15] भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी ।
[01:11.90] गायत्री नित कलिमल दहनी ॥॥
[01:15.40] अक्षर चौबीस परम पुनीता ।
[01:19.40] इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता ॥॥
[01:23.90] शाश्वत सतोगुणी सत रूपा ।
[01:27.90] सत्य सनातन सुधा अनूपा ॥॥
[01:32.15] हंसारूढ श्वेतांबर धारी ।
[01:36.40] स्वर्ण कांति शुचि गगन-बिहारी ॥॥
[01:40.40] पुस्तक पुष्प कमंडलु माला ।
[01:44.65] शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ॥॥
[01:48.65] ध्यान धरत पुलकित हित होई ।
[01:52.90] सुख उपजत दुख दुर्मति खोई ॥॥
[01:57.15] कामधेनु तुम सुर तरु छाया ।
[02:01.15] निराकार की अद्भुत माया ॥॥
[02:05.65] तुम्हरी शरण गहै जो कोई ।
[02:09.65] तरै सकल संकट सों सोई ॥॥
[02:13.90] सरस्वती लक्ष्मी तुम काली ।
[02:18.15] दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ॥॥
[02:22.15] तुम्हरी महिमा पार न पावैं ।
[02:26.65] जो शारद शत मुख गुन गावैं ॥॥
[02:30.90] चार वेद की मात पुनीता ।
[02:34.90] तुम ब्रह्माणी गौरी सीता ॥॥
[02:39.15] महामंत्र जितने जग माहीं ।
[02:43.15] कोउ गायत्री सम नाहीं ॥॥
[02:47.65] सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै ।
[02:51.40] आलस पाप अविद्या नासै ॥॥
[02:55.65] सृष्टि बीज जग जननि भवानी ।
[02:59.90] कालरात्रि वरदा कल्याणी ॥॥
[03:04.15] ब्रह्मा विष्णु रुद्र सुर जेते ।
[03:08.15] तुम सों पावें सुरता तेते ॥॥
[03:12.65] तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे ।
[03:16.65] जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे ॥॥
[03:20.90] महिमा अपरम्पार तुम्हारी ।
[03:24.90] जय जय जय त्रिपदा भयहारी ॥॥
[03:29.15] पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना ।
[03:33.40] तुम सम अधिक न जगमें आना ॥॥
[03:37.65] तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा ।
[03:41.65] तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेसा ॥॥
[03:45.65] जानत तुमहिं तुमहिं व्है जाई ।
[03:49.65] पारस परसि कुधातु सुहाई ॥॥
[03:54.40] तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई ।
[03:58.65] माता तुम सब ठौर समाई ॥॥
[04:02.15] ग्रह नक्षत्र ब्रह्मांड घनेरे ।
[04:06.65] सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ॥॥
[04:10.90] सकल सृष्टि की प्राण विधाता ।
[04:14.90] पालक पोषक नाशक त्राता ॥॥
[04:19.15] मातेश्वरी दया व्रत धारी ।
[04:23.40] तुम सन तरे पातकी भारी ॥॥
[04:27.90] जापर कृपा तुम्हारी होई ।
[04:31.65] तापर कृपा करें सब कोई ॥॥
[04:35.90] मंद बुद्धि ते बुधि बल पावें ।
[04:40.15] रोगी रोग रहित हो जावें ॥॥
[04:44.15] दरिद्र मिटै कटै सब पीरा ।
[04:48.15] नाशै दुख हरै भव भीरा ॥॥
[04:52.40] गृह क्लेश चित चिंता भारी ।
[04:56.65] नासै गायत्री भय हारी ॥॥
[05:00.90] संतति हीन सुसंतति पावें ।
[05:04.90] सुख संपति युत मोद मनावें ॥॥
[05:09.40] भूत पिशाच सबै भय खावें ।
[05:13.90] यम के दूत निकट नहिं आवें ॥॥
[05:17.90] जो सधवा सुमिरें चित लाई ।
[05:21.65] अछत सुहाग सदा सुखदाई ॥॥
[05:26.15] घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी ।
[05:30.15] विधवा रहें सत्य व्रत धारी ॥॥
[05:34.40] जयति जयति जगदंब भवानी ।
[05:38.40] तुम सम ओर दयालु न दानी ॥॥
[05:42.65] जो सतगुरु सो दीक्षा पावे ।
[05:46.65] सो साधन को सफल बनावे ॥॥
[05:50.90] सुमिरन करे सुरूचि बडभागी ।
[05:56.15] लहै मनोरथ गृही विरागी ॥॥
[05:59.40] अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता ।
[06:03.65] सब समर्थ गायत्री माता ॥॥
[06:07.65] ऋषि मुनि यती तपस्वी योगी ।
[06:11.90] आरत अर्थी चिंतित भोगी ॥॥
[06:16.15] जो जो शरण तुम्हारी आवें ।
[06:20.15] सो सो मन वांछित फल पावें ॥॥
[06:24.40] बल बुधि विद्या शील स्वभाउ ।
[06:28.65] धन वैभव यश तेज उछाउ ॥॥
[06:33.15] सकल बढें उपजें सुख नाना ।
[06:37.40] जे यह पाठ करै धरि ध्याना ॥
[06:53.15] ♪
[06:55.15] यह चालीसा भक्ति युत पाठ करै जो कोई ।
[06:56.90] तापर कृपा प्रसन्नता गायत्री की होय ॥
