Uski aawaz by kavita Seth
[00:20.86] दिन-महीने-बरस हटाती हुई
[00:28.03] बीच के फासले मिटाती हुई
[00:36.00] दिल में क्या, रूह में समाती हुई
[00:43.17] जैसे जादू कोई जगाती हुई
[00:50.35] सुबह की ताज़गी के साथ हवा
[00:57.79] जैसे कलियों के पास आती है
[01:05.48] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[01:12.92] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[01:20.36] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[02:04.99] रात गहरी, बिना किनारा हो
[02:12.69] कोई साथी हो ना सहारा हो
[02:19.86] ना कोई चाँद ना सितारा हो
[02:27.30] ना सहर का कोई इशारा हो
[02:34.73] नाउम्मीदी के घोप अंधेरे में
[02:41.91] जैसे एक शम्मा झिलमिलाती है
[02:49.31] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[02:56.73] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[03:04.43] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[03:30.67] रोशनी-सी है अब निगाहों में
[03:37.87] घेर लेती हैं मुझको राहों में
[03:45.57] ख़ुदको पाती हूँ मैं पनाहों में
[03:52.48] कैसा जादू है इसकी बाहों में?
[03:59.92] रंग और नूर-सा झलकता है
[04:07.09] जैसे दुनिया नई दिखाती है
[04:14.53] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[04:21.70] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[04:28.87] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[04:36.33] दिन-महीने-बरस हटाती हुई
[04:43.50] बीच के फासले मिटाती हुई
[04:50.93] दिल में क्या, रूह में समाती हुई
[04:58.37] जैसे जादू कोई जगाती हुई
[05:05.54] सुबह की ताज़गी के साथ हवा
[05:12.71] जैसे कलियों के पास आती है
[05:20.15] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[05:27.32] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
[05:34.76] उसकी आवाज़ ऐसे आती है
