Ganesh Chalisa
[00:00.90] ।। दोहा ।।
[00:12.90] जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल ।
[00:25.90] विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ।।
[00:38.65] ।। चौपाई ।।
[00:52.40] जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ।।
[01:04.90] जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ।।
[01:27.90] वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ।।
[01:38.65] राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ।।
[01:44.40] पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ।।
[01:53.15] सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ।।
[01:59.65] धनि शिव सुवन षडानन भ्राता । गौरी लालन विश्व-विख्याता ।।
[02:11.90] ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे । मुषक वाहन सोहत द्वारे ।।
[02:32.90] कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुची पावन मंगलकारी ।।
[02:44.15] एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ।।
[02:51.40] भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ।।
[03:00.15] अतिथि जानी के गौरी सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ।।
[03:07.15] अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ।।
[03:18.40] मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ।।
[03:40.40] गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ।।
[03:50.90] अस कही अन्तर्धान रूप हवै । पालना पर बालक स्वरूप हवै ।।
[03:58.65] बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ।।
[04:05.65] सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ।।
[04:13.40] शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ।।
[04:25.90] लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ।।
[04:48.65] निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ।।
[04:57.15] गिरिजा कछु मन भेद बढायो । उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ।।
[05:05.40] कहत लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ।।
[05:13.15] नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहयऊ ।।
[05:21.90] पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ।।
[05:32.15] गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी । सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ।।
[05:55.15] हाहाकार मच्यौ कैलाशा । शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ।।
[06:04.15] तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटी चक्र सो गज सिर लाये ।।
[06:11.90] बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ।।
[06:21.15] नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ।।
[06:27.40] बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ।।
[06:39.65] चले षडानन, भरमि भुलाई । रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ।।
[06:57.15] चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ।।
[07:09.90] धनि गणेश कही शिव हिये हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ।।
[07:19.15] तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ।।
[07:26.40] मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ।।
[07:33.90] भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ।।
[07:46.40] अब प्रभु दया दीना पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ।।
[07:59.65] ।। दोहा ।।
[08:02.40] श्री गणेशा यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान ।
[08:15.40] नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ।।
[08:27.90] सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।
[08:40.90] पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश ।।
