हनुमान चालीसा
[00:04.39] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
[00:16.08] बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
[00:26.70] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
[00:38.12] बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
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[00:58.58] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
[01:03.89] जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
[01:09.47] रामदूत अतुलित बल धामा।
[01:14.51] अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
[01:25.14] महाबीर बिक्रम बजरंगी।
[01:30.45] कुमति निवार सुमति के संगी।।
[01:36.03] कंचन बरन बिराज सुबेसा।
[01:41.34] कानन कुंडल कुंचित केसा।।
[01:46.65] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
[01:51.70] कांधे मूंज जनेऊ साजै।
[01:57.01] संकर सुवन केसरीनंदन।
[02:02.33] तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
[02:12.95] विद्यावान गुनी अति चातुर।
[02:18.53] राम काज करिबे को आतुर।।
[02:23.58] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
[02:28.89] राम लखन सीता मन बसिया।।
[02:34.47] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
[02:39.25] बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
[02:44.58] भीम रूप धरि असुर संहारे।
[02:50.16] रामचंद्र के काज संवारे।।
[03:00.78] लाय सजीवन लखन जियाये।
[03:05.83] श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
[03:11.14] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
[03:16.72] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
[03:21.76] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
[03:26.81] अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
[03:32.39] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
[03:37.44] नारद सारद सहित अहीसा।।
[03:48.06] जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
[03:53.64] कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
[03:58.69] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
[04:04.00] राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
[04:09.31] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
[04:14.62] लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
[04:19.94] जुग सहस्र जोजन पर भानू।
[04:25.25] लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
[04:35.87] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
[04:41.19] जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
[04:46.23] दुर्गम काज जगत के जेते।
[04:51.81] सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
[04:57.39] राम दुआरे तुम रखवारे।
[05:02.44] होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
[05:07.75] सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
[05:13.06] तुम रक्षक काहू को डर ना।।
[05:23.69] आपन तेज सम्हारो आपै।
[05:29.00] तीनों लोक हांक तें कांपै।।
[05:34.31] भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
[05:39.09] महाबीर जब नाम सुनावै।।
[05:44.94] नासै रोग हरै सब पीरा।
[05:49.98] जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
[05:55.56] संकट तें हनुमान छुड़ावै।
[06:00.61] मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
[06:11.23] सब पर राम तपस्वी राजा।
[06:16.81] तिन के काज सकल तुम साजा।
[06:22.12] और मनोरथ जो कोई लावै।
[06:26.90] सोइ अमित जीवन फल पावै।।
[06:32.49] चारों जुग परताप तुम्हारा।
[06:37.80] है परसिद्ध जगत उजियारा।।
[06:43.11] साधु-संत के तुम रखवारे।
[06:48.42] असुर निकंदन राम दुलारे।।
[06:58.78] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
[07:04.09] अस बर दीन जानकी माता।।
[07:09.40] राम रसायन तुम्हरे पासा।
[07:14.19] सदा रहो रघुपति के दासा।।
[07:20.03] तुम्हरे भजन राम को पावै।
[07:25.08] जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
[07:30.39] अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
[07:35.70] जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
[07:46.33] और देवता चित्त न धरई।
[07:51.37] हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
[07:56.69] संकट कटै मिटै सब पीरा।
[08:02.00] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
[08:07.31] जै जै जै हनुमान गोसाईं।
[08:12.36] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
[08:17.67] जो सत बार पाठ कर कोई।
[08:22.98] छूटहि बंदि महा सुख होई।।
[08:33.34] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
[08:38.66] होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
[08:43.97] तुलसीदास सदा हरि चेरा।
[08:49.01] कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
[09:03.62] पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
[09:18.76] राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
