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Hanuman Chalisa HI

Gulsan Kumar
[09:42.56]·Synced by Guest·
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[00:01.42] ॥ दोहा ॥

[00:02.17] श्रीगुरु चरन सरोज रज

[00:08.19] निज मनु मुकुरु सुधारि ।

[00:13.18] बरनउँ रघुवर बिमल जसु

[00:18.42] जो दायकु फल चारि ॥

[00:23.92] बुद्धिहीन तनु जानिके

[00:29.18] सुमिरौं पवन-कुमार ।

[00:35.17] बल बुधि विद्या देहु मोहिं

[00:42.43] हरहु कलेस विकार ॥

[00:49.68] ॥ चौपाई ॥

[00:55.92] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

[01:00.93] जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

[01:06.68] राम दूत अतुलित बल धामा ।

[01:11.67] अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

[01:22.44] महावीर विक्रम बजरंगी ।

[01:27.67] कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥

[01:32.42] कंचन वरन विराज सुवेसा ।

[01:37.92] कानन कुण्डल कुंचित केसा ॥४॥

[01:43.43] हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे ।

[01:48.93] काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥

[01:54.43] शंकर सुवन केसरीनन्दन ।

[01:59.18] तेज प्रताप महा जग बंधन ॥६॥

[02:09.67] विद्यावान गुनी अति चातुर ।

[02:15.18] राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

[02:20.68] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

[02:25.67] राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

[02:30.93] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

[02:36.17] विकत रूप धरि लंक जरावा ॥९॥

[02:41.67] भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

[02:46.68] रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥

[02:57.18] लाय संजीवन लखन जियाये ।

[03:02.42] श्रीरघुवीर हरषि उर लाये ॥११॥

[03:07.68] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

[03:12.94] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

[03:18.17] सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।

[03:23.43] अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥

[03:29.18] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

[03:33.93] नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

[03:44.67] यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

[03:50.17] कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

[03:55.43] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।

[04:00.42] राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

[04:05.68] तुम्हारो मन्त्र विभीषण माना ।

[04:10.67] लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥१७॥

[04:16.68] जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

[04:21.68] लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥

[04:32.18] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

[04:37.44] जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥

[04:42.67] दुर्गम काज जगत के जेते ।

[04:47.93] सुगम अनुग्रह तुम्हारे तेते ॥२०॥

[04:53.19] राम दुआरे तुम रखवारे ।

[04:58.18] होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

[05:03.93] सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।

[05:09.18] तुम रक्षक काहू को डर ना ॥२२॥

[05:19.93] आपन तेज सम्हारो आपै ।

[05:24.92] तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥

[05:29.94] भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।

[05:35.17] महावीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

[05:40.43] नासै रोग हरै सब पीड़ा ।

[05:45.93] जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥

[05:51.68] संकट तें हनुमान छुड़ावै ।

[05:56.92] मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

[06:07.43] सब पर राम तपस्वी राजा ।

[06:12.43] तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

[06:17.42] और मनोरथ जो कोई लावै ।

[06:22.68] सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

[06:28.18] चारों जुग परताप तुम्हारा ।

[06:33.42] है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

[06:39.18] साधु सन्त के तुम रखवारे ।

[06:43.94] असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥

[06:54.43] अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।

[06:59.67] अस वर दीन जानकी माता ॥३१॥

[07:05.17] राम रसायन तुम्हारे पासा ।

[07:09.92] सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

[07:15.43] तुम्हारे भजन राम को पावै ।

[07:20.68] जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

[07:26.43] अन्त काल रघुवर पुर जाई ।

[07:31.42] जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

[07:41.92] और देवता चित्त न धरई ।

[07:46.69] हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥३५॥

[07:52.17] संकट कटै मिटै सब पीड़ा ।

[07:57.19] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

[08:02.68] जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

[08:08.44] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥

[08:13.43] जो शत बार पाठ कर कोई ।

[08:18.17] छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥

[08:28.43] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

[08:33.69] होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

[08:38.92] तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

[08:44.18] कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

[08:56.43] ॥ दोहा ॥

[08:58.18] पवनतनय संकट हरन

[09:05.93] मंगल मूरति रूप ।

[09:14.18] राम लखन सीता सहित

[09:22.17] हृदय बसहु सुर भूप ॥