Hanuman Chalisa
[00:00.64] ॥ दोहा ॥
[00:03.90] श्रीगुरु चरन सरोज रज
[00:09.40] निज मनु मुकुरु सुधारि ।
[00:15.40] बरनउँ रघुवर बिमल जसु
[00:20.65] जो दायकु फल चारि ॥
[00:26.40] बुद्धिहीन तनु जानिके
[00:33.16] सुमिरौं पवन-कुमार ।
[00:40.40] बल बुधि विद्या देहु मोहिं
[00:46.66] हरहु कलेस विकार ॥
[00:52.16] ॥ चौपाई ॥
[00:55.40] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
[00:59.16] जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
[01:02.91] राम दूत अतुलित बल धामा ।
[01:06.65] अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥
[01:10.39] महावीर विक्रम बजरंगी ।
[01:13.91] कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥
[01:17.90] कंचन वरन विराज सुवेसा ।
[01:21.40] कानन कुण्डल कुंचित केसा ॥४॥
[01:25.14] हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे ।
[01:28.91] काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥
[01:32.41] शंकर सुवन केसरीनन्दन ।
[01:35.91] तेज प्रताप महा जग बंधन ॥६॥
[01:43.40] विद्यावान गुनी अति चातुर ।
[01:47.41] राम काज करिबे को आतुर ॥७॥
[01:51.15] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
[01:54.65] राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥
[01:58.39] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
[02:01.91] विकत रूप धरि लंक जरावा ॥९॥
[02:05.66] भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
[02:09.40] रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥
[02:13.14] लाय संजीवन लखन जियाये ।
[02:16.64] श्रीरघुवीर हरषि उर लाये ॥११॥
[02:20.65] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
[02:24.15] तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥
[02:31.66] सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
[02:35.65] अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥
[02:38.90] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
[02:42.89] नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥
[02:46.66] यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
[02:49.91] कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥
[02:53.66] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।
[02:57.40] राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥
[03:01.14] तुम्हारो मन्त्र विभीषण माना ।
[03:04.64] लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥१७॥
[03:08.41] जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
[03:12.15] लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥
[03:26.91] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
[03:30.65] जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥
[03:33.90] दुर्गम काज जगत के जेते ।
[03:37.91] सुगम अनुग्रह तुम्हारे तेते ॥२०॥
[03:41.90] राम दुआरे तुम रखवारे ।
[03:45.40] होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥
[03:49.14] सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
[03:52.91] तुम रक्षक काहू को डर ना ॥२२॥
[03:56.65] आपन तेज सम्हारो आपै ।
[04:00.15] तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥
[04:04.16] भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।
[04:07.66] महावीर जब नाम सुनावै ॥२४॥
[04:18.89] नासै रोग हरै सब पीड़ा ।
[04:22.39] जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥
[04:25.91] संकट तें हनुमान छुड़ावै ।
[04:30.15] मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥२६॥
[04:33.65] सब पर राम तपस्वी राजा ।
[04:37.14] तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥
[04:40.91] और मनोरथ जो कोई लावै ।
[04:44.41] सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥
[04:48.40] चारों जुग परताप तुम्हारा ।
[04:51.65] है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥
[04:55.66] साधु सन्त के तुम रखवारे ।
[04:59.41] असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥
[05:10.39] अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
[05:13.91] अस वर दीन जानकी माता ॥३१॥
[05:17.90] राम रसायन तुम्हारे पासा ।
[05:21.40] सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥
[05:25.14] तुम्हारे भजन राम को पावै ।
[05:29.40] जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥
[05:32.65] अन्त काल रघुवर पुर जाई ।
[05:36.15] जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥
[05:39.90] और देवता चित्त न धरई ।
[05:43.40] हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥३५॥
[05:47.16] संकट कटै मिटै सब पीड़ा ।
[05:50.91] जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥
[05:56.65] जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
[05:59.91] कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥
[06:03.65] जो शत बार पाठ कर कोई ।
[06:07.40] छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥
[06:11.41] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
[06:14.91] होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥
[06:18.65] तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
[06:22.39] कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥
[06:25.91] ॥ दोहा ॥
[06:29.66] पवनतनय संकट हरन
[06:33.15] मंगल मूरति रूप ।
[06:36.65] राम लखन सीता सहित
[06:40.91] हृदय बसहु सुर भूप ॥
