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Ashtak

Unknown artist
[06:14.33]·
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[00:06.17] बाल समय रवि भक्षि लियो तब,

[00:10.16] तीनहुं लोक भयो अंधियारों

[00:14.41] ताहि सो त्रास भयो जग को,

[00:18.16] यह संकट काहु सों जात न टारो

[00:23.16] देवन आनि करी विनती तब,

[00:26.91] छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो

[00:32.16] को नहीं जानत है जग में कपि,

[00:38.91] संकटमोचन नाम तिहारो, को – ॥१॥

[00:54.16] बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,

[00:57.91] जात महाप्रभु पंथ निहारो

[01:02.41] चौंकि महामुनि शाप दियो तब ,

[01:06.66] चाहिए कौन बिचार बिचारो

[01:10.91] कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,

[01:15.17] सो तुम दास के शोक निवारो, – को ॥२॥

[01:36.17] अंगद के संग लेन गए सिय,

[01:40.16] खोज कपीश यह बैन उचारो

[01:44.42] जीवत ना बचिहौ हम सो जु ,

[01:48.67] बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो

[01:53.16] हेरी थके तट सिन्धु सबै तब ,

[01:57.17] लाए सिया-सुधि प्राण उबारो,- को ॥३॥

[02:23.66] रावण त्रास दई सिय को तब ,

[02:27.67] राक्षसि सो कही सोक निवारो

[02:31.91] ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,

[02:35.92] जाए महा रजनीचर मारो

[02:40.42] चाहत सीय असोक सों आगिसु ,

[02:44.66] दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो, -को ॥४॥

[03:05.41] बान लग्यो उर लछिमन के तब ,

[03:09.66] प्राण तजे सुत रावन मारो

[03:13.41] लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,

[03:17.41] तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो

[03:21.66] आनि संजीवन हाथ दई तब ,

[03:28.41] लछिमन के तुम प्रान उबारो, – को ॥५॥

[03:52.16] रावन युद्ध अजान कियो तब ,

[03:56.42] नाग कि फांस सबै सिर डारो

[04:00.41] श्री रघुनाथ समेत सबै दल ,

[04:04.16] मोह भयो यह संकट भारो

[04:08.91] आनि खगेस तबै हनुमान जु ,

[04:13.41] बंधन काटि सुत्रास निवारो,- को ॥६॥

[04:33.66] बंधु समेत जबै अहिरावन,

[04:37.16] लै रघुनाथ पताल सिधारो

[04:41.41] देवहिं पूजि भली विधि सों बलि ,

[04:45.41] देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो

[04:49.67] जाये सहाए भयो तब ही ,

[04:53.41] अहिरावन सैन्य समेत संहारो,- को ॥७॥

[05:14.66] काज किये बड़ देवन के तुम ,

[05:18.41] बीर महाप्रभु देखि बिचारो

[05:22.66] कौन सो संकट मोर गरीब को ,

[05:26.92] जो तुमसो नहिं जात है टारो

[05:30.91] बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,

[05:34.66] जो कछु संकट होए हमारो,- को ॥८॥

[00:00.00] ॥ दोहा ॥

[00:00.00] लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर ।

[00:00.00] बज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर ॥