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शांतिधारा

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[00:01.33] ॐ नमः सिद्धेभ्यः, श्री वीतरागाय नमः, ॐ नमोऽर्हते भगवते,

[00:17.54] श्रीमते श्री पार्श्व तीर्थ‌ङ्कराय, द्वादशगण परवेष्टिताय, शुक्लध्यान पवित्राय,

[00:30.02] सर्वज्ञाय स्वयंभुवे, सिद्धाय, बुद्धाय, परमात्मने, परम सुखाय,

[00:41.19] त्रैलोक्यमही व्याप्ताय, अनंतसंसार चक्रपरिमर्दनाय, अनन्त दर्शनाय,

[00:51.55] अनन्त ज्ञानाय, अनन्त वीर्याय, अनंत सुखाय, त्रैलोक्य वशङ्कराय,

[01:01.65] सत्यज्ञानाय, सत्यब्रह्मणे, धरणेन्द्र फणा मण्डल-मण्डिताय,

[01:10.67] मुनि आर्यिका-श्रावक-श्राविका-प्रमुख चतुस्संघोपसर्ग विनाशनाय,

[01:19.44] घातिकर्म विनाशनाय, अघातिकर्म विनाशनाय परमपूज्य गुरुवर

[01:28.47] आचार्य श्री वर्धमान सागराणां, चतुर्विध संघस्य,

[01:35.13] सकल दिगम्बर जैन समाजस्य, जिनोदय युवा संघस्य,

[01:41.23] शांतिधारा कर्ता नामधेयस्य अस्माकं च अपायं छिन्धि-छिन्धि भिन्धि-भिन्धि ।

[01:47.35] मृत्युं, अतिकामं, रतिकामं, क्रोधं, सर्वोपसर्गं, सर्व-विघ्नं, सर्व-भयं,

[02:00.90] सर्व-राजभयं, सर्व-अग्निभयं, सर्व-चोरभयं, सर्व-दुष्टभयं, सर्व-मृगराजभयं,

[02:14.98] सर्व-मात्मचक्रभयं, सर्व-परमंत्रं, सर्व-शूलरोगं, सर्व-क्षयरोगं,

[02:25.07] सर्व-कुष्ठरोगं, सर्व-क्रूररोगं, सर्व-नरमारीं, सर्व-गजमारीं,

[02:35.45] सर्वा-श्वमारीं, सर्व-गोमारीं, सर्व-महिषमारीं, सर्व-धान्यमारीं,

[02:45.27] सर्व-वृक्षमारीं, सर्व-गुल्ममारीं, सर्व-पत्रमारीं, सर्व-पुष्पमारीं,

[02:55.63] सर्व-फलमारीं, सर्व-राष्ट्रमारीं, सर्व-देशमारीं, सर्व-विषमारीं,

[03:05.73] सर्व-वेताल-डाकिनी-शाकिनीभयं, सर्व-वेदनीयं, सर्व-मोहनीयं,

[03:16.61] सर्व-कर्माष्टकं छिन्धि-छिन्धि भिन्धि-भिन्धि ।

[03:20.08] ॐ सुदर्शन महाराज परमपूज्य गुरुवर आचार्य श्री वर्धमान सागराणां,

[03:29.09] चतुर्विध संघस्य, सकल दिगम्बर जैन समाजस्य, जिनोदय युवा संघस्य,

[03:37.33] शांतिधारा कर्ता नामधेयस्य मम चक्र-विक्रम तेजो बल-शौर्य-वीर्य-शांतिं

[03:45.31] कुरु-कुरु, सर्व जनानन्दनं कुरु कुरु, सर्व भव्यानन्दनं कुरु-कुरु,

[03:51.15] सर्व गोकुलानन्दनं कुरु कुरु, सर्व ग्राम-नगर-खेट-खर्वट-मटंब

[03:58.04] -पत्तन-द्रोणमुख संवाहानन्दनं कुरु कुरु, सर्व लोकानन्दनं कुरु-कुरु,

[04:05.49] सर्व देशानन्दनं कुरु-कुरु, सर्व यजमानानन्दनं कुरु-कुरु,

[04:11.60] मम सर्व शारीरिक आदिक दुःखं हन-हन दह-दह

[04:16.90] पच-पच पाचय-पाचय कुट-कुट शीघ्रं शीघ्रं।

[04:23.55] यत्सुखं त्रिषु लोकेषु, व्याधि-व्यसन वर्जितं ।

[04:29.13] अभयं क्षेम-मारोग्यं, स्वस्त्यरस्तु विधीयते।

[04:35.77] श्री शांतिरस्तु शिवमस्तु ! कुल-गोत्र-धन-धान्यं सदास्तु

[04:43.48] पद्मप्रभ चन्द्रप्रभ-वासुपूज्य-मल्लि वर्द्धमान-पुष्पदन्त

[04:50.92] शीतल-मुनिसुव्रत-नेमिनाथ-पार्श्वनाथ इत्येभ्यो जिनेभ्यो नमः।

[04:59.70] इत्यनेन मन्त्रेण नवग्रहाणां शान्त्यर्थं गन्धोदक-धारा- वर्षणं।

[05:08.99] णमो जिणाणं झ्रौं झ्रौं स्वाहा।* णमो ओहि जिणाणं।

[05:13.50] णमो परमोहि जिणाणं। णमो सव्वोहि जिणाणं।

[05:19.09] णमो अणंतोहि जिणाणं। णमो कोट्ठ बुद्धीणं। णमो बीज बुद्धीणं।

[05:28.38] णमो पदाणुसारीणं। णमो सभिण्णसोदारणं। णमो सयंबुद्धाणं।

[05:37.40] णमो पत्तेय बुद्धाण। णमो बोहिय बुद्धाणं। णमो उजुमदीणं ।

[05:47.51] णमो विउलमदीणं। णमो दसपुव्वीणं। णमो चउदस पुव्वीणं।

[05:55.47] णमो अठंगमहाणिमित्त कुसलाणं। णमो विउव्वण-इड्ढि पत्ताणं।

[06:02.92] णमो विज्जाहराणं। णमो चारणाणं। णमो पण्णसमणाणं।

[06:11.95] णमो आगासगामीणं। णमो आसीविसाणं। णमो दिठ्ठिविसाणं।

[06:21.52] णमो उग्गतवाणं । णमो दित्ततवाणं। णमो तत्ततवाणं।

[06:31.35] णमो महातवाणं। णमो घोरतवाणं। णमो घोरगुणाणं। णमो घोरपरक्कमाणं।

[06:43.83] णमो घोर-गुण-बंभ-यारीणं। णमो आमोसहिपत्ताणं।

[06:51.53] णमो खेलोसहिपत्ताणं। णमो जल्लोसहिपत्ताणं । णमो विप्पोसहि पत्ताणं।

[07:01.63] णमो सव्वोसहिपत्ताणं। णमो मणबलीणं। णमो वयबलीणं।

[07:10.66] णमो कायबलीणं। णमो खीरसवीणं। णमो सप्पिसवीणं।

[07:19.15] णमो महुरसवीणं। णमो अमियसवीणं। णमो अक्खीण महाणसाणं ।

[07:28.22] ण्मो वड्ढमाणाणं। णमो सिद्धायदणाणं। णमो भयवदो महदि

[07:37.52] महावीर वड्ढमाण बुद्धिरिसिणं चेदि झ्रौं झ्रौं नमः स्वाहा।

[07:44.95] ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं वं मं हं सं तं पं वं वं मं मं हं हं

[07:50.81] सं सं तं तं पं पं झं झं झ्वीं झ्वीं क्ष्वीं क्ष्वीं द्रां द्रां द्रीं द्रीं

[07:58.77] द्रावय द्रावय ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते पवित्रतर शान्तिधारया अभिषिञ्चे नमः ।

[08:07.27] संपूजकानां प्रतिपालकानां, यतीन्द्र सामान्य तपोधनानाम् ।

[08:18.43] देशस्य राष्ट्रस्य पुरस्य राज्ञः, करोतु शान्तिं भगवान् जिनेन्द्रः ।।