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Krishna flute

Various
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[00:00.00] ♪

[00:01.54] जय श्री कृष्णा!!♥️♥️

[00:25.56] ♪

[00:27.72] मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है; और लगातार तुम्हे बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है.

[01:00.85] ♪

[01:02.70] क्रोध से  भ्रम  पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.

[01:27.63] ♪

[01:29.44] The mind acts like an enemy for those who do not control it.

[01:49.17] ♪

[01:50.84] मैं सभी प्राणियों को सामान रूप से देखता हूँ; ना कोई मुझे कम प्रिय है ना अधिक. लेकिन जो मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते हैं वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में आता हूँ.

[02:23.59] ♪

[02:25.09] तू करता वही हैं, जो तू चाहता हैं, होता वही है जो मैं चाहता हूँ, तू वही कर जो मैं चाहता हूँ फिर होगा वही, जो तू चाहता हैं.

[02:51.19] ♪

[02:53.20] जानने की शक्ति झूठ को सच से पृथक करने वाली जो विवेक बुद्धि हैं, उसी का नाम ज्ञान हैं.

[03:13.69] ♪

[03:15.22] तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नही हैं, और फिर भी ज्ञान की बातें करते हो, बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं.

[03:47.80] ♪

[03:49.39] मन अशांत हो तो उसे नियंत्रित करना कठिन हैं लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता हैं.

[04:11.27] ♪

[04:12.74] वह जो वास्तविकता में मेरे उत्कृष्ट जन्म और गतिविधियों को समझता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनः जन्म नहीं लेता और मेरे धाम को प्राप्त होता है.

[04:39.66] ♪

[04:44.16] “मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो

[04:47.48] परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है…

[04:51.16] “मैं श्रेष्ठ हूँ”  यह आत्मविश्वास है!!

[04:53.38] लेकिन “सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ”  यह अहंकार है…”

[04:57.35] ♪

[05:00.40] “इच्छा पूरी नहीं होती तो क्रोध बढ़ता है, और इच्छा पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है। इसलिये जीवन की हर स्थिति में धैर्य बनाये रखना ही श्रेष्ठता है।”

[05:23.24] ♪

[05:24.68] शांति से भी दुखों का अंत हो जाता है और शांत चित्त मनुष्य की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर होकर परमात्मा से युक्त हो जाती है।

[05:46.27] ♪

[05:47.81] क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है।

[06:02.89] जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है।

[06:06.72] जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।

[06:12.59] ♪

[06:13.98] परिवर्तन संसार का नियम है।

[06:15.83] जिसे तुम मृत्यु समझते हो वही तो जीवन है।

[06:18.66] एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो,

[06:23.00] दूसरे चरण में तुम दरिद्र हो जाते हो।

[06:26.92] कर्म उसे नहीं बांधता जिसने काम का त्याग कर दिया है।

[06:34.14] ♪

[06:36.24] जय श्री कृष्णा!!♥️